
भोपाल: मध्यप्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र 7 दिसंबर से शुरू होकर 11 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान सदन की कार्यवाही कुल पांच दिनों तक चलेगी। पांच दिवसीय सत्र को लेकर विपक्षी कांग्रेस ने ऐतराज जताते हुये भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। इसी बीच, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुये आरोप लगाया कि जनता के सवालों से भाजपा सरकार भाग रही है।
उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है लेकिन सरकार के पास विधानसभा में इन मुद्दों पर चर्चा करने के लिए पर्याप्त समय नहीं है। उन्होंने कहा कि.. शीतकालीन सत्र केवल पांच दिनों का बुलाया गया है। इससे पहले मानसून सत्र भी पांच दिनों के लिए निर्धारित था लेकिन उसे महज तीन दिनों में ही समाप्त कर दिया गया था।
नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने कहा कि बालाघाट में बच्चों की मौत, सागर और देवास में जहरीली शराब से मौतें, किसानों की बदहाली, युवाओं की बेरोजगारी, महिलाओं की सुरक्षा, आदिवासी अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बढ़ता कर्ज और बिगड़ती कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों पर जनता को सरकार से जवाब चाहिए, लेकिन सरकार अपनी जवाबदेही से बचना चाहती है।
सिंघार बोले- सदन छोटा कर सकती है सरकार, जनता के सवाल नहीं
सिंघार ने आगे कहा कि प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों से चुने गए विधायक 7 करोड़ से अधिक जनता की आवाज हैं। जब जनता के इतने सवाल हों, तो विधानसभा में चर्चा के लिए समय बढ़ना चाहिए, घटाना नहीं। सरकार सदन छोटा कर सकती है लेकिन जनता के सवालों को नहीं। कांग्रेस विधायक दल सदन में जनता के हर मुद्दे को मजबूती से उठाएगा और भाजपा सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह बनाएगा।
जनता के सवालों से भाग रही भाजपा सरकार, विधानसभा का सत्र फिर सिर्फ 5 दिन!
मध्यप्रदेश में समस्याओं का अंबार है, लेकिन भाजपा सरकार के पास विधानसभा में चर्चा के लिए समय नहीं है।
शीतकालीन सत्र मात्र 5 दिनों का बुलाया गया है। इससे पहले मानसून सत्र भी 5 दिन का था, लेकिन उसे 3 दिन में ही खत्म कर दिया गया।
बालाघाट में बच्चों की मौत, सागर और देवास में जहरीली शराब से मौतें, किसानों की बदहाली, युवाओं की बेरोजगारी, महिलाओं की सुरक्षा, आदिवासी अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बढ़ता कर्ज और बिगड़ती कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों पर जनता को सरकार से जवाब चाहिए, लेकिन सरकार अपनी जवाबदेही से बचना चाहती है।
प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों से चुने गए विधायक 7 करोड़ से अधिक जनता की आवाज़ हैं। जब जनता के इतने सवाल हों, तो विधानसभा में चर्चा के लिए समय बढ़ना चाहिए, घटाना नहीं!
सरकार सदन छोटा कर सकती है, लेकिन जनता के सवालों को नहीं!
कांग्रेस विधायक दल विधानसभा में जनता के हर मुद्दे को मजबूती से उठाएगा और भाजपा सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह बनाएगा।
@CMMadhyaPradesh @nstomar @MPVidhanSabha
@INCIndia @INCMP#US13245
— Umang Singhar (@UmangSinghar) November 6, 2026
पांच दिनों तक होंगी विधानसभा की बैठकें
बता दें कि शीतकालीन सत्र 7 दिसंबर से शुरू होकर 11 दिसंबर तक चलेगा। राज्यपाल मंगुभाई पटेल की मंजूरी के बाद विधानसभा सचिवालय ने 12वें सत्र की अधिसूचना जारी कर दी है। जानकारी अनुसार, सोमवार 7 दिसंबर 2026 से विधानसभा के शीतकालीन सत्र की शुरुआत होगी। पहले दिन प्रश्नोत्तर के बाद शासकीय कार्य संपादित किए जाएंगे।
इसी तरह मंगलवार 8 दिसंबर, बुधवार 9 दिसंबर और गुरुवार 10 दिसंबर को भी प्रश्नोत्तर के बाद शासकीय कार्यों के लिये समय निर्धारित किया गया हैं। इन चारों दिनों सदन में विधायी और अन्य शासकीय कामकाज होंगे।
अशासकीय कार्यों के लिए भी निर्धारित समय
वहीं, शुक्रवार 11 दिसंबर को सत्र का अंतिम दिन होगा। इस दिन भी सबसे पहले प्रश्नोत्तर होंगे। इसके बाद दोपहर 1:30 बजे तक शासकीय कार्य संपादित किये जाएंगे। दोपहर 1:30 बजे के बाद सदन में अशासकीय कार्यों के लिये समय निर्धारित किया गया है। इस तरह पांच दिवसीय सत्र के अंतिम दिन अशासकीय कार्यों को भी कार्यसूची में शामिल किया गया है।
7 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.
