MP में बिजली महंगी होने की आहट, उमंग सिंघार बोले “जनता की जेब काटना नहीं, चोरी रोकना सरकार का काम”

कांग्रेस नेता ने कहा कि नए टैरिफ ड्राफ्ट का असर आम उपभोक्ताओं के बिजली बिल पर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से बिजली चोरी और वितरण हानि रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
Umang Singhar

मध्यप्रदेश में बिजली की दरों और लाइन लॉस को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की जनता पहले से महंगाई का सामना कर रही है और अब बिजली को भी महंगा करने की तैयारी की जा रही है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के टैरिफ ड्राफ्ट में बिजली की दरों में करीब 10 फीसदी तक बढ़ोतरी का असर उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि “चोरी रोकना सरकार और बिजली कंपनी की जिम्मेदारी है, जनता की जेब काटना नहीं।”

उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा

उमंग सिंघार ने कहा है कि विद्युत नियामक आयोग के टैरिफ ड्राफ्ट में बिजली कंपनियों के नुकसान और लाइन लॉस की वसूली का बड़ा हिस्सा उपभोक्ताओं पर डालने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि 14 फीसदी के निर्धारित नुकसान की जगह 24.5 फीसदी तक नुकसान की भरपाई उपभोक्ताओं से कराने का प्रावधान चिंता का विषय है। उनका कहना है कि इसका सीधा असर घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के मासिक बिल पर पड़ेगा।

बिजली व्यवस्था में निवेश को लेकर भी उमंग सिंघार ने सरकार से सवाल किया। उन्होंने कहा कि हजारों करोड़ रुपये के निवेश और बिजली नेटवर्क को आधुनिक बनाने की योजनाओं के बावजूद यदि लाइन लॉस और बिजली चोरी का बोझ ईमानदारी से बिल चुकाने वाले उपभोक्ताओं पर डाला जाता है, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने जारी किया नए टैरिफ नियमों का ड्राफ्ट

मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने अगले पांच साल के लिए नए टैरिफ नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है। इस ड्राफ्ट में बिजली की वितरण हानि (लाइन लॉस) की स्वीकार्य सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव है। अभी मध्य क्षेत्र में यह सीमा लगभग 14 प्रतिशत है। ड्राफ्ट में इसे 24.5 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रावधान रखा गया है। पूर्व क्षेत्र के लिए 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 23 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।

इसका अर्थ ये है कि अगर सिस्टम में 100 यूनिट बिजली डाली जाती है तो अब 24.5 यूनिट तक का नुकसान जायज माना जा सकता है। इससे अतिरिक्त बिजली खरीद की लागत उपभोक्ताओं के बिल में जुड़ सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार इससे बिजली बिल पर करीब 10 प्रतिशत तक बोझ बढ़ने की आशंका है। यानी 1,000 का बिल 1,100 तक पहुंच सकता है। आयोग ने इस ड्राफ्ट पर 1 सितंबर तक जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं और इसपर अंतिम फैसला जनसुनवाई के बाद लिया जाएगा।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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