एमवाय अस्पताल घटना पर बोले जीतू पटवारी, “बच्चों को चूहों ने नहीं भ्रष्टाचारी प्रशासन ने क्षति पहुंचाई”

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि एमवाय अस्पताल में चूहे बच्चों को खा रहे हैं और भ्रष्टाचार से भाजपा नेताओं का पेट भर रहा है , इसलिए जितना दोषी चूहा है उतनी ही दोषी ये व्यवस्था है ।
MY Hospital Indore

देश के सबसे साफ़ शहर इंदौर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमवाय हॉस्पिटल में चूहे के काटने से एक नवजात की मौत होने की घटना पर सियासत शुरू हो गई है, मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने घटना पर नाराजगी जाहिर करते हुए प्रदेश की भाजपा सरकार से सवाल किये हैं।

महाराजा यशवंत राव अस्पताल यानि एमवाय इंदौर में अव्यवस्था का क्या आलम है ये पिछले दिनों सामने आई घटना ने उजागर कर दिया है, अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के चलते जो घटना सामने आई है उसपर आश्चर्य होना लाजमी है, अस्पताल में चूहों का इतना आतंक हो चुका है कि उसने एक नवजात की जान ले ली और दूसरा गंभीर हालत में है, यानि अस्पताल में बड़े बड़े चूहे वार्ड में भर्ती मासूमों के शरीर को कुतर गए और जिम्मेदारों को दिखाई ही नहीं दिया।

दो नर्सिंग अधिकारी निलंबित, पेस्ट कंट्रोल कंपनी पर जुर्माना 

घटना सामने आने के बाद जब  किरकिरी हुई तो प्रबंधन ने नर्सिंग अधिकारी अकांक्षा बेंजोमिन और श्वेता चौहान को निलंबित कर दिया और आईसीयू इंचार्ज को शोकाज नोटिस थमा दिया, इसके अलावा पेस्ट कंट्रोल कंपनी पर एक लाख का जुर्माना लाग दिया इस तरह प्रबंधन ने अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली।

प्रदेश की भाजपा सरकार पर उठ रहे सवाल 

घटना पर कांग्रेस ने सवाल उठाये हैं, मीडिया से बात करते हुए मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि 22 साल के भाजपा के शासन का असली चेहरा है, एम वाय में ये चूहों की हरकत नहीं है, उन्होंने कहा नवजात बच्चों को चूहों ने क्षति नहीं पहुंचाई ये भ्रष्टाचारी प्रशासन ने क्षति पहुंचाई है।

जीतू पटवारी ने पूछा बिल्ली जैसे चूहे कैसे हो गए ?

जीतू पटवारी ने सरकार से और एम वाय अस्पताल प्रबंधन से सवाल किया कि वो ये बताएं कि बहुत पैसा खर्च करने के बाद भी ये हालत क्यों हैं? अराजकता क्यों हैं? बिल्ली जैसे बड़े बड़े चूहे कैसे हो गए? जीतू पटवारी ने तंज कसते हुए कहा कि  इतनी बड़ी घटना के बाद भी सरकार में अस्पताल अधीक्षक को सजा देने की हिम्मत नहीं होगी, छोटे कर्मचारी की सजा जरुर दे देंगे।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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