आदेश जारी नहीं होने से असमंजस में प्रोफेसर, उच्च शिक्षा विभाग स्थिति स्पष्ट करे

आदेश जारी नहीं होने से असमंजस में प्रोफेसर, उच्च शिक्षा विभाग स्थिति स्पष्ट करे

भोपाल| लॉक डाउन (Lockdown) के चौथे चरण को लेकर उच्च शिक्षा विभाग (Higher Education Department) द्वारा स्तिथि स्पष्ट नहीं करने से पूरे प्रदेश के महाविद्यालयों में असमंजश की स्थिति बनी हुई है| इस सम्बन्ध में प्रांतीय शासकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ के प्रांत अध्यक्ष प्रोफ़ेसर कैलाश त्यागी ने प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है|

पत्र में संघ के प्रांत अध्यक्ष प्रोफ़ेसर कैलाश त्यागी ने कहा लॉकडाउन 2 के बाद परीक्षा संचालन एवं प्रवेश फार्म को दृष्टिगत रखते हुए शिक्षकों को ग्रीष्मावकाश की अवधि 18 मई से 20 जून तक के लिए कर्तव्य पर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के लिए निर्देश दिए गए थे| लॉक डाउन 3 में भी सभी महाविद्यालयों को 17 मई तक बंद रखे जाने एवं शिक्षकों को मुख्यालय पर ही उपस्थित रहकर प्राचार्यों से संपर्क बनाए रखने के लिए निर्देशित किया गया था|

लॉक डाउन 4 में भी दिनांक 18 मई से 31 मई तक पूरे देश में स्कूल एवं कॉलेजों को गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा बंद रखे जाने के लिए मार्गदर्शिका जारी की गई| लेकिन इस बार उच्च शिक्षा विभाग द्वारा ना तो संस्थाएं बंद रखे जाने के संबंध में और ना ही ग्रीष्म अवकाश घोषित किए जाने के संबंध में कोई आदेश जारी किया गया है| जिस कारण पूरे प्रदेश में असमंजस की स्थिति व्याप्त है| वहीं शिक्षकों द्वारा अवगत कराया गया है कि प्रचारियों ने उन्हें महाविद्यालय में उपस्थित होकर कार्य करने के लिए आदेश दिया है जो कि गृह मंत्रालय भारत सरकार की गाइडलाइन का स्पष्ट उल्लंघन है| विभाग इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी करें|

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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