लेट फीस नहीं वसूल सकेंगे निजी स्कूल, आदेश जारी

लेट फीस नहीं वसूल सकेंगे निजी स्कूल, आदेश जारी

भोपाल। स्कूल शिक्षा विभाग (School Education Department) ने निजी स्कूलों को फीस सम्बन्धी जरूरी आदेश जारी किये हैं| ऐसे पालकगण जो परिस्थितिवश शैक्षणिक सत्र 2019- 20 की बकाया शुल्क जमा नहीं कर पाए हैं । वो 30 जून तक जमा कर सकेंगे| निजी स्कूल इनसे विलंब शुल्क नहीं वसूलेंगे| साथ ही निजी स्कूल फीस में वृद्धि नहीं कर सकेंगे|

विभाग ने आदेश में कहा है कि आगामी आदेश तक वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2020 -21 में निजी स्कूलों द्वारा कोई शुल्क वृद्धि नहीं की जा सकेगी| अभिभावकों से फीस की एकमुश्त अदायगी देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा । अभिभावक अपनी सुविधानुसार किस्तों में फीस का भुगतान करेंगे। फीस जमा न किये जाने पर किसी छात्र/छात्रा का नाम स्कूल से नहीं काटा जाएगा|

आदेश में कहा गया है कि वर्तमान परिस्थितियों के दृष्टिगत अभिभावकों की आर्थिक कठिनाइयों के कारण यदि उनके द्वारा आपदा अवधि में शुल्क को स्थगित किए जाने का अनुरोध किया जाता है तो निजी विद्यालय इस पर सकारात्मक रूप से विचार करेंगे एवं फीस स्थगित किए जाने की स्थिति में उक्त शुल्क को आगामी माह में किस्तों के आधार पर समायोजित किया जा सकेगा| विद्यालय में कार्यरत शैक्षणिक तथा गैर शैक्षणिक स्टाफ को नियमित रूप से वेतन का भुगतान किया जाएगा| किसी भी स्थिति में संबंधित बोर्ड की पुस्तकों के अतिरिक्त पुस्तकों के लिए अभिभावकों को बाध्य नहीं किया जाएगा|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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