तेलंगाना से 1030 मजदूरों को लेकर भोपाल पहुंची स्पेशल ट्रैन, जांच के बाद घरों को रवाना

तेलंगाना से 1030 मजदूरों को लेकर भोपाल पहुंची स्पेशल ट्रैन, जांच के बाद घरों को रवाना

भोपाल| अन्य राज्यों में फंसे मजदूरों (laborers) की घर वापसी का दौर जारी है| बुधवार को तेलंगाना (Telangana) से मजदूरों को लेकर स्पेशल ट्रेन (Special Train) भोपाल (Bhopal) पहुंची| स्पेशल ट्रेन करीब 1030 श्रमिक को लेकर राजधानी भोपाल के हबीबगंज स्टेशन (Habibganj) पहुँची| प्रदेश के 32 अलग-अलग जिलों के श्रमिक वापस लौटे हैं| तेलंगाना से आने वालों में सबसे ज्यादा बालाघाट के 307 श्रमिक हैं| हबीबगंज रेलवे स्टेशन से सभी श्रमिकों को उनके जिले रवाना किया गया|

कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी तरुण पिथोड़े के नेतृत्व में जिला प्रशासन द्वारा इन सभी श्रमिकों की मेडिकल स्क्रीनिंग कराई गई। इसके बाद यात्रा के दौरान भोजन, नाश्ता के पैकेट और पानी की बोतल देते हुए इन्हें इनके निवास स्थान के लिए रवाना किया।

प्रदेश के विभिन्न जिलों में निवासरत श्रमिकों में बालाघाट के 307, बैतूल के 50, भोपाल के 100, हरदा के 2, रायसेन के 7, सीहोर के 4, विदिशा के 9, भिंड के 46, अशोकनगर के 2, दतिया के 42, ग्वालियर के 12, मुरैना के 46, श्योपुर के 2, शिवपुरी के 7, बड़वानी के 44, बुरहानपुर के 5, धार का 1, इंदौर के 3, झाबुआ के 7, खंडवा 7, खरगोन के 5, छिंदवाड़ा के 54, नरसिंहपुर के 12, छतरपुर के 25, दमोह के 36, पन्ना के 40, सागर के 7, टीकमगढ़ के 23, देवास के 4, रतलाम के 15, उज्जैन के 4, सिवनी के 95, निमाड़ के 01 और अन्य जिले के 6 श्रमिकों को विभिन्न बसों के माध्यम से भेजा गया। विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत इन मज़दूरों में बड़े, बुजुर्ग, महिलायें और बच्चे शामिल थे।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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