MP को ‘मदिरा प्रदेश’ बनाने के आरोप लगाने वाले आज शराब के सबसे बड़े पैरोकार बन गये : कमलनाथ

MP को ‘मदिरा प्रदेश’ बनाने के आरोप लगाने वाले आज शराब के सबसे बड़े पैरोकार बन गये : कमलनाथ

भोपाल| मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में कोरोना संकट (Corona Crisis) के बीच शराब दुकानें (Liquor Shops) सियासी मुद्दा बन गई है| एक तरफ सरकार ने शराब दुकानें खोले जाने की अनुमति दी है, वहीं शराब कारोबारियों ने स्तिथि सामान्य नहीं होने तक दुकानें नहीं खोलने का फैसला किया है| इसको लेकर अब कांग्रेस ने सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है| पूर्व सीएम व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ (Kamalnath) ने ट्वीट कर हमला बोलते हुए कहा शिवराज सरकार (Shivraj Government) चाहती है कि इस महामारी में भले धार्मिक स्थल ना खुले, लेकिन शराब की दुकानें जरूर खुले| प्रदेश भले कोरोना की चपेट में आता जाये इन्हे कोई फर्क नहीं पड़ता|

पूर्व सीएम कमलनाथ ने ट्वीट कर शिवराज सरकार पर हमला बोला है| उन्होंने लिखा- ‘प्रदेश में कोरोना महामारी के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्रदेश का आमजन , यहाँ तक की ख़ुद शराब के ठेकेदार भी नहीं चाहते है कि प्रदेश में शराब की दुकाने अभी खुले लेकिन शिवराज सरकार चाहती है कि इस महामारी में भले धार्मिक स्थल ना खुले| स्कूल-कॉलेज ना खुले,लोगों को दूध,दवाई,आवश्यक वस्तु ना मिले लेकिन शराब ज़रूर मिले,शराब की दुकाने ज़रूर खुले ?

विपक्ष में थे तो विरोध करते थे, अब शराब के सबसे बड़े पैरोकार बन गये
कमलनाथ ने कहा ‘यह वही लोग है जो विपक्ष में बैठकर प्रदेश में शराब को लेकर रोज़ विरोध करते थे , इसे बहन-बेटियों के लिये ख़तरा बताते थे , प्रदेश को मदिरा प्रदेश बनाने के आरोप लगाते थे। आज सत्ता में आकर यही शराब के सबसे बड़े पैरोकार बन गये है। प्रदेश भले कोरोना की चपेट में आता जाये कोई फ़र्क़ नहीं लेकिन शराब की बिक्री अनवरत चालू रहे ‘।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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