भोपाल में सहायक संचालक 25 हजार की रिश्वत लेते ट्रैप, लोकायुक्त ने सरकारी गाड़ी से उतारकर पकड़ा

भोपाल में सहायक संचालक 25 हजार की रिश्वत लेते ट्रैप, लोकायुक्त ने सरकारी गाड़ी से उतारकर पकड़ा

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| राजधानी भोपाल (Bhopal) में गुरूवार को लोकायुक्त पुलिस (Lokayukt Police) ने बड़ी कार्रवाई की है| टीम ने पिछड़ा वर्ग एवं अल्प संख्यक कल्याण विभाग के सहायक संचालक एचबी सिंह को 25 हजार रुपए की रिश्वत (Bribe) लेते पकड़ा है। अधिकारी रिश्वत के रुपए अपनी पेंट की जेब में रखकर कर कार से निकलने की तैयारी में था, तभी लोकायुक्त की टीम ने अधिकारी को सतपुड़ा भवन के गेट पर ही पकड़ लिया

लोकायुक्त पुलिस के मुताबिक, धार जिले के वल्लभ पाटीदार नामक किसान की शिकायत पर एच बी सिंह सहायक संचालक पिछड़ा वर्ग एवं अल्प संख्यक कल्याण सतपुड़ा भवन भोपाल को 25 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है| शिकायतकर्ता के पुत्र हेमंत पाटीदार की स्वीकृत ओवरसीज स्कॉलरशिप एरिजोना यूनिवर्सिटी फिनिक्स सिटी यूएसए के भुगतान और पांच हजार डॉलर वृद्धि करने के एवज में यह रिश्वत ली गई थी| टीम ने अधिकारी को सतपुड़ा भवन के मुख्यद्वार पर रंगेहाथ पकड़ लिया|

आरोपी ने पूर्व में एक दो लाख रुपए की मांग की थी| बाद में चर्चा के दौरान आरोपी ने स्कॉलरशिप की राशि पांच हजार डॉलर बढ़ाकर चार हजार डॉलर स्वयं रखने तथा एक हजार डॉलर शिकायत कर्ता के पुत्र को देने पर सहमति जताई और 25000 रुपये लाकर देने का कहा| शिकायत कर्ता ने पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त भोपाल को इस संबंध में 27 जनवरी को शिकायत की थी| शिकायत की तस्दीक के बाद लोकयुक्त की टीम ने आज अधिकारी को 25 हजार की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ लिया| आरोपी ने रिश्वत के रुपये प्राप्त कर अपने पेंट के पीछे की जेब में रख लिये थे और अपने शासकीय आल्टो कार से घर जाने की तैयारी की, तभी लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी को दबोच लिया।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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