कपूर – करीबी प्रसिद्ध फ़िल्म समीक्षक जयप्रकाश चौकसे की नजर में, देखे वीडियो

कपूर – करीबी प्रसिद्ध फ़िल्म समीक्षक जयप्रकाश चौकसे की नजर में, देखे वीडियो

इंदौर।आकाश धोलपुरे।

22 मार्च को पीएम मोदी की अपील के बाद अपने घर से थाली बजाकर कोरोना वारियर्स की हौंसला अफ़जाई करने वाले बॉलीवुड के बेहतरीन कलाकार ऋषि कपूर आज पंचतत्व में विलीन हो गए है। आज सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली जिसके बाद मुंबई के चंदनवाड़ी शमशान में उनका अंतिम संस्कार किया गया। बता दे कि मुंबई के साथ ही मिनी मुंबई याने इंदौर से भी उनका करीबी नाता रहा है।

दरअसल ऋषि कपूर के करीबी मित्र और फ़िल्म समीक्षक इंदौर के रहने वाले है। जय प्रकाश चौकसे के राजकपूर के जमाने से कपूर खानदान से पारिवारिक संबंध थे। ऋषिकपूर के अचानक यूं चले जाने के बाद इंदौर में उनके मित्र जयप्रकाश चौकसे ने दुःख जताया और उनसे जुड़ी यादों को एक इंटरव्यू के जरिये साझा किया। उन्होंने बताया कि ऋषि कपूर पिछले दो साल से कैंसर से जूझ रहे थे। अमेरिका के कैंसर अस्पताल में कई दिन गुजारने के बाद पिछले साल सितम्बर में जब ऋषि लौटे, तो उन्होंने बताया था कि उनका इलाज अभी पूरा नहीं हुआ है ये आगे भी जारी रहेगा और पूरी तरह से ठीक होने में वक्त लगेगा।

फ़िल्म समीक्षक जेपी चौकसे ने इस साल तबियत ख़राब होने पर फ़रवरी में अस्पताल में भर्ती कराया गया था बाद में वे मुंबई में वायरल फीवर की वजह से भर्ती हुए थे। दो दिन पहले उन्हें सांस लेने में परेशानी की वजह से फिर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जय प्रकाश चौकसे ने बताया कि कई दफा इंदौर आये है और उन्होंने हर बार अपनी बातों और अपने अंदाज से लोगो को प्रभावित किया है। जयप्रकाश चौकसे ने एक इंटरव्यू के जरिये ऋषि कपूर की आदतों, व्यवहार,उनके फिल्मी सफर और निर्देशन के बारे में बताया।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews