मध्य प्रदेश में निरस्त होंगे पंचायत चुनाव! शिवराज कैबिनेट बैठक में हुआ ये बड़ा फैसला

मप्र पंचायत चुनाव

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट । मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव (MP Panchayat Election 2021-22) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। ओबीसी आरक्षण और वर्तमान हालातों को देखते हुए पंचायत चुनाव फिलहाल टाले जाएंगे।  प्रदेश की शिवराज सरकार ने आज रविवार को हुई कैबिनेट बैठक में इसे लेकर एक बड़ा फैसला लिया है, इसके तहत शिवराज सरकार ने पंचायत चुनाव निरस्त से जुड़ा एक प्रस्ताव पास किया है।सरकार अब इसे राज्यपाल को भेजेगी। इस पर मंजूरी मिलने के बाद इसे चुनाव आयोग को भेजा जाएगा।इसके बाद संभावना जताई जा रही है कुछ समय के लिए पंचायत चुनावों को टाल दिए जाए।

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आज मंत्रि-परिषद् ने मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं स्वराज (संशोधन) अध्यादेश 2021 को अनुमोदित किया। इसका प्रस्ताव पारित कर राज्यपाल के पास भेजा गया है। मध्य प्रदेश कैबिनेट द्वारा प्रदेश में पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 9 (क) के अंतर्गत होने वाले पंचायत चुनाव के अध्यादेश को निरस्त करने का प्रस्ताव पारित कर महामहिम राज्यपाल को भेजने का निर्णय लिया। इसके बाद सीएम शिवराज सिंह चौहान राज भवन पहुंचकर राज्यपाल मंगु भाई पटेल से मिले और कुछ देर वहां रुकने के बाद वापस सीएम हाउस रवाना हो गए। माना जा रहा है कि सीएम शिवराज ने राज्यपाल को कैबिनेट की बैठक में लिए गए अध्यादेश वापस लेने के निर्णय से अवगत कराया है।

आज रविवार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक (Shivraj Cabinet Meeting) में शिवराज सरकार द्वारा पंचायत चुनाव अधिनियम के तहत जारी अध्यादेश निरस्त करने का प्रस्ताव पास किया गया है, जिसे पंचायत मंत्री महेन्द्र सिसोदिया ने रखा था। कैबिनेट ने राज्यपाल को अध्यादेश निरस्ती मंजूरी के लिये भेजा है। संभावना जताई जा रही है कि राज्यपाल प्रस्ताव पर मोहर लगाने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव निरस्तीकरण के लिए निर्देश दे सकते हैं।विधानसभा के संकल्प और अध्यादेश वापस लेने की अधिसूचना जारी होने के बाद मौजूदा चुनाव प्रक्रिया को रोक दिया जाएगा।

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ग्रामीण विकास मंत्री महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस के हंगामे और सदन में अपरिहार्य कारणों से संशोधन विधेयक पारित नहीं हो पाया और सुप्रीम कोर्ट का भी जो आदेश था उसे मानने करते हुए इस अध्यादेश को महामहिम राज्यपाल को वापस करने का प्रस्ताव पारित किया है। अध्यादेश को पारित किए बिना ओबीसी आरक्षण और परिसीमन नहीं किया जा सकता है अब आगे की प्रक्रिया राज्य निर्वाचन आयोग को सुनिश्चित करना है। चुनाव कराना या ना कराना निर्वाचन आयोग को फैसला करना है सरकार ने अपनी भूमिका स्पष्ट कर दी है।

ओबीसी पर सरकार का फोकस

इससे पहले 5 दिवसीय मप्र विधानसभा के शीतकालीन सत्र में मप्र सरकार द्वारा सर्वसम्मति से अशासकीय संकल्प पारित किया था कि मध्यप्रदेश में पंचायत चुनाव ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) के बिना न हों, जिसे राज्य निर्वाचन आयोग को भेजा जाएगा और फिर आयोग तय करेगा कि चुनाव की प्रक्रिया जारी रहेगी या फिर इसे टाला जाएगा? हालांकि विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. गिरीश गौतम और गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने पंचायत चुनाव फिलहाल टलने के संकेत दिए थे।

इधर, ओबीसी आरक्षण को लेकर भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan)गंभीर हो चले है। उन्होंने उन्होंने ओबीसी मतदाताओं की गिनती कराने का फैसला किया है और कलेक्टरों से इसकी 7 जनवरी तक रिपोर्ट मांगी है।वही पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण और रोटेशन को लेकर कांग्रेस द्वारा लगाई गई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में अब 3 जनवरी 2022 को सुनवाई होगी।

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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

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