Subhash Chandra Bose Jayanti : मंच पर चढ़े तो ‘नेताजी’ का नाम ही भूल गए सांसद, वीडियो वायरल

Subhash Chandra Bose Jayanti : मंच पर चढ़े तो ‘नेताजी’ का नाम ही भूल गए सांसद, वीडियो वायरल

इंदौर, आकाश धोलपुरे| अपने कार्यो को दुनिया मे दिखाने के लिए हर संभव प्रयास करने वाले इंदौर (Indore) के बीजेपी सांसद शंकर लालवानी (BJP MP Shankar Lalwani) कई बार ऐसी गलती कर जाते है कि जो उन्हें स्वयं को भारी पड़ जाती है और कई बार बीजेपी को भी। देश में अलग सिंधी राज्य की मांग कर पहले भी बड़ा बखेड़ा कर चुके सांसद शंकर लालवानी की जुबान एक बार फिर फिसल गई| जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है|

देश को जय हिंद का नारा देने वाले नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आज जयंती है और इस मौके पर इंदौर में नगर निगम द्वारा एक कार्यक्रम आयोजित किया गया| जिसमें देश के नम्बर 1 सांसद शंकर लालवानी बतौर अतिथि पहुंचे| यहां उन्होंने पहले लोगो से मुलाकात की और सिर पर लगी नेताजी की टोपी के साथ मंच पर चढ़े। इस दौरान जब उनके संबोधन की बारी आई तो कुछ ऐसा हुआ जिससे उनकी किरकिरी हो रही है।

इंजीनियरिंग कर चुके लालवानी इंदौर सांसद है और उनकी जुबान मंच पर फिसल गई और नेताजी के जयंती समारोह में जहां जहां उन्हें नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जिक्र करना था वहां वहां उन्होंने चन्द्रशेखर आजाद का नाम लिया, इतना ही नही एक दफा तो उन्होंने अपने भाषण में चन्द्रशेखर बोस तक कह डाला। इन्दौर सांसद के कंफ्यूजन और फिसली जुबान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे सांसद अपनी सुध बुध खो गए और उनकी जुबान फिसल गई। अब इंदौर सहित ये वीडियो प्रदेश और देश मे तेजी से वायरल है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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