प्रेक्षा मेहता की खुदकुशी के बाद सामने आया अभिनेता करण कुंद्रा का ये बड़ा ट्वीट

प्रेक्षा मेहता की खुदकुशी के बाद सामने आया अभिनेता करण कुंद्रा का ये बड़ा ट्वीट

इंदौर।

मिनी मुंबई(mini mumbai) से मुंबई(mumbai) की और उड़ान भरने वाली इंदौर(indore) की प्रेक्षा मेहता(preksha mehta) नामक टीवी सीरियल(Tv serial) अभिनेत्री(heroine) और यु ट्यूब सेलिब्रिटी(youtube celebrity) फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। दरअसल, लॉक डाउन(lockdown) के बाद से प्रेक्षा मेहता उम्र 25 वर्ष इंदौर में आ गई थी।वो मुंबई में टीवी सीरियल में काम करती थी। क्राइम पेट्रोल के भी कई प्रोग्राम में उसने अभिनय किया था। मरने से पहले उनका आखिरी स्टेटस था। सबसे बुरा होता है सपनों का मर जाना। जिसके बाद टीवी एक्टर करण कुंद्रा ने उनके निधन पर शोक जताया है।

गुरुवार को एक्टर करण कुंद्रा(actor karan kundra) ने प्रेक्षा मेहता की मौत पर शोक जाहिर करते हुए ट्वीट किया। ट्वीट में करण कुंद्रा ने लिखा है कि ‘सबसे बुरा होता है सपनों का मर जाना। एक और टीवी एक्टर ने सुसाइड कर लिया और उसने अपने इंस्टाग्राम पर लास्ट में पोस्ट किया था।ये बहुत दुखद है। तुम बहुत यंग थी।तु म्हारे सामने पूरी जिंदगी थी। हमें मानसिक स्वास्थ्य पर और ज्यादा बात करने की जरूरत है। करण आगे लिखते हैं कि उसके इंस्टाग्राम पर देखें तो ऐसा कुछ भी असाधारण सा नहीं दिखता। यह इस बात का भी संकेत है कि इस मुश्किल घड़ी में हमारे आस-पास के लोगों का और ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है। तुम्हारी आत्मा को शांति मिले। हम तुम्हारे लिए प्रार्थना करते हैं। करण के अलावा अभिनेता अर्जुन बिजलानी ने लिखा कि पता चला कि एक और एक्टर ने आत्महत्या कर ली है। परिवार को सांत्वना। प्रेक्षा मेहता के लिए प्रार्थना।

बता दें कि थिएटर में प्रेक्षा की शुरुआत अभिजीत वाडकर, संतोष रेगे और नगेंद्र सिंह राठौर के नाट्य ग्रुप ‘ड्रामा फैक्टरी’ से हुई। मंटो का लिखा नाटक ‘खोल दो’ उनका पहला प्ले था। इसमें मिले जबरदस्त रिस्पांस के बाद वो ‘खूबसूरत बहू, बूंदें, राक्षस, प्रतिबिंबत, पार्टनर्स, हां, थ्रिल, अधूरी औरत’ जैसे नाटकों में काम कर चुकी हैं। उन्हें अभिनय के लिए भी तीन राष्ट्रीय नाट्य उत्सवों में फर्स्ट प्राइज मिल चुका है। एकल नाट्य ‘सड़क के किनारे” में जानदार अभिनय के लिए भी उन्होंने अवार्ड जीता। ये माना जा रहा है अभिनय की ललक और दीवानगी ने ही प्रेक्षा को खुद की जान लेने को मजबूर कर दिया होगा। प्रेक्षा तो मौत की आगोश में समा गई लेकिन अपने मौत के पीछे कई सवाल छोड़ गई।

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निदेशक और संपादक

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