फ्रांस के राष्ट्रपति के खिलाफ प्रदर्शन: उमा ने बताया ‘राष्ट्रद्रोह’, साध्वी बोली-‘भोपाल में ऐसे गद्दारों की कमी नहीं’

फ्रांस के राष्ट्रपति के खिलाफ प्रदर्शन: उमा ने बताया ‘राष्ट्रद्रोह’, साध्वी बोली-‘भोपाल में ऐसे गद्दारों की कमी नहीं’

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| राजधानी भोपाल (Bhopal) में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (emmanuel macron) के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है| प्रदेश की 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव (Byelection) से पहले बीजेपी (BJP) ने इसे ‘राष्ट्रवाद’ के मुद्दे से जोड़ दिया है| भाजपा नेताओं के लगातार बयान सामने आ रहे हैं| अब बीजेपी की फायर ब्रांड नेता व पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती (Uma Bharti) ने इसे ‘राष्ट्रद्रोह’ बताया है| वहीं बीजेपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर (Pragya Thakur) का कहना है कि ऐसे लोगों के खिलाफ देश में कानून बनना चाहिए|

उमा भारती ने ट्वीट कर लिखा-फ्रांस में हुई घटना के बाद आतंकवाद के समर्थन में भोपाल में जो रैली निकली एवं कांग्रेस के विधायक आरिफ मसूद ने नेतृत्व किया यह सीधा सीधा राष्ट्रद्रोह है। उन्होंने आगे लिखा- शिवराज जी इस पर तुरंत कठोरतम कार्यवाही करें एवं श्री कमलनाथ जी तथा सोनिया गांधी जी प्रदेश की जनता को इसका स्पष्टीकरण दें कि क्या वह विधायक के इस कृत्य का समर्थन करते हैं? या विधायक पर कार्यवाही का समर्थन करते हैं।

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के विवादित बोल
इधर, भोपाल सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने कहा, आतंकी गतिविधियोंं को फैलाने वाले लोग विधर्मी हैं, क्यों यही वर्ग होता है, चीन में ये लोग क्यों उचक नहीं पाते हैं, चीन जो नियम बनाता है उस पर इन लोगों को चलना पड़ता है, भारत को भी ऐसे नियम बनाने चाहिए, भोपाल में ऐसे गद्दारों की कमी नहीं है, ये लोग देश को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं, वहाँ जाकर समर्थन करना चाहिए भून दिए जाओगे, यहां बोलने की स्वतंत्रता है इसलिए ऐसा होता है, इसलिए इनके लिए कानून बनना चाहिए|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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