साहित्यकार अरूणाभ सौरभ की काव्य कृति आद्य-नायिका का मंचन, यक्षिणी के माध्यम से स्त्री विमर्श की पड़ताल

साहित्यकार अरूणाभ सौरभ की काव्य कृति आद्य-नायिका का मंचन, यक्षिणी के माध्यम से स्त्री विमर्श की पड़ताल

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, भोपाल (Regional College For Education Research and Technology) के सेवा पूर्व शिक्षक प्रशिक्षुओं के लिए नाट्य कार्यशाला और प्रदर्शन के तहत नाट्य प्रस्तुति ‘आद्य-नायिका’ का मंचन किया गया। श्यामला हिल्स स्थित कॉलेज के सभागार में सफलतापूर्वक मंचित नाटक ‘आद्य नायिका’ का लेखन डॉ.अरुणाभ सौरभ और निर्देशन निलेश दीपक ने किया है। प्रस्तुति बी.एस.सी बी.एड छठे सेमेस्टर के क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान के विद्यार्थियों की रही और जिसे हिंदी रंगभूमि नई दिल्ली के सहयोग से किया गया।

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नाटक में इतिहास, मिथक और हमारा समय तीनों को एक साथ प्रस्तुत करके रचनात्मक आयाम दिया गया है। दीदारगंज की यक्षिणी सौ साल बाद पुन: एक नई भाव-भंगिमा और अर्थ-छवि के साथ हमारे सामने आती है। जहाँ एक ओर प्राचीन गणतंत्र और नगरों, उनके बीच के आपसी वैमनस्य, उनकी दुरभिसंधियों और षडयंत्रों के साथ-साथ ज्ञान, विज्ञान और कला की प्राचीन उपलब्धियों को यथाप्रसंग उपस्थित करती है। वहीं एक स्त्री के स्त्रीत्व की तलाश है जिनमें अथाह शक्तियाँ हैं। यह नाटक नए प्रतीकार्थ रचने के सामर्थ्य को दर्शाता है। इसमें वैभवशाली मगध और अखण्ड भारत की राजधानी पाटलिपुत्र के उत्थान और पतन की पड़ताल है। आद्य नायिका ‘यक्षिणी’ के सहारे देवलोक, गंधर्वलोक से लेकर मृत्युलोक तक पसरी उस पितृसत्तात्मक संरचना को भी प्रश्नांकित करता है जिसमें स्त्रियों का सदा से ही शोषण किया जाता रहा है। यहाँ इस बात को दोहराया गया है कि स्त्री के बिना वह चाहे देव पुरुष हो या गंधर्व या इस धरती का सामान्य पुरुष, किसी के अस्तित्व की कल्पना संभव नहीं। ‘प्रकृति’ और ‘पुरुष’ के संयोग से सृष्टि के निर्माण की संभावना की बात भारतीय दर्शन करता है। नाटक के प्रदर्शन से शिक्षाशास्त्रीय विविध अवयवों को समझना आसान हो जाता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आलोक में यह प्रस्तुति प्राचीन भारतीय कला एवं संस्कृति को रूपायित करती है और पौराणिक शास्त्रीय और लोक कलाओं का समायोजन भी।

क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान में यह नाटक दस दिवसीय कार्यशाला में तैयार किया गया। इस नाट्य कार्यशाला में रंगमंच के तमाम बारीकियों मसलन अभिनय, संगीत, मंच परिकल्पना और नृत्य आदि तमाम अवयवों पर प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला का निर्देशन नीलेश दीपक ने किया। कार्यशाला में संगीत प्रशिक्षक लखन लाल अहरिवार, नृत्य प्रशिक्षक आस्था परिभाषा और मंच पार्श्व के लिए धीरज शहंशाह, श्याम, पूजा, वैभवी आदि शामिल थे। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. अरुणाभ सौरभ, डॉ. सुरेश मकवाणा, विस्तार शिक्षा के अध्यक्ष प्रोफेसर प्रवीण कुलश्रेष्ठ तथा प्राचार्य प्रोफेसर जयदीप मंडल, संयुक्त निदेशक प्रो मेहरोत्रा पंसुंश के व्यावसायिक शिक्षा संस्थान भोपाल साथ साथ क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान के सभी संकाय सदस्यों की उपस्थिति महत्वपूर्ण रही।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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