जनता कर्फ्यू का सोशल अंदाज, फरमाइशी गीतों से भगाया जा रहा है कोरोना फियर

जनता कर्फ्यू का सोशल अंदाज, फरमाइशी गीतों से भगाया जा रहा है कोरोना फियर

इंदौर//आकाश धौलपुरे।

यूं तो देशभर के तमाम सेलिब्रिटीज कोरोना से बचाव के तरीके अपने प्रशंसकों को बता रहे है। जिन्हें मीडिया में सोशल अपील के तौर पर दिखाया भी जा रहा है और इस बात की सराहना भी हो रही है लेकिन इंदौर में कोरोना से बचाव व उसके डर को दूर करने के लिए सोशल मीडिया पर एक अनूठा कार्यक्रम लाइव आयोजित किया जा रहा है।

दरअसल, “म्यूजिक भी और मोटिवेशन भी” की सुमधुर प्रस्तुति इंदौर के शुक्ला ब्रदर्स द्वारा फेसबुक पर आयोजित किया जा रहा है। शुक्ला ब्रदर्स की माने तो पीएम मोदी के संदेश के बाद से ही उन्होंने सोच लिया था कि कुछ ऐसा इनोवेटिव किया जाए जिससे कोरोना के प्रति अवेयरनेस भी बढ़े और लोगो के मन ने सुमधुर गीतों की गूंज उनकी फरमाइश के हिसाब से सुनाई जा सके। “शुक्ला ब्रदर्स” ने आज सुबह 10:00 बजे से म्यूजिक और मोटिवेशन को लेकर फरमाइश गीत सुनानी शुरू की जिसका सिलसिला बदस्तूर जारी है। शुक्ला ब्रदर्स की माने तो पहली बार हम लाइव फेसबुक शो कर रहे हैं और यह कार्यक्रम टेरेस गार्डन PADAV से आयोजित किया जा रहा है और अब तक उनके पास लगभग 600 फरमाइश, गीतों के लिए आई है। वही 1 हजार से ज्यादा लोगो ने अब तक उनकी प्रस्तुति को लाइक्स और कमैंट्स के जरिये सराहा है खासकर उन बुजुर्ग लोगों ने जो किसी और माध्यम से अपना मनोरंजन नहीं कर पा रहे थे।

हालांकि फ़ेसबुक के माध्यम से देश मे ये पहला अनूठा प्रयोग है जिसमे ना सिर्फ इंदौर के लोग बल्कि प्रदेश और देश के अलग – अलग हिस्सों में रहने वाले लोग जुड़ रहे है। इस आयोजन के बीच मे कोरोना के प्रति लोग कैसे अवेयर रहे इस बात को भी सुरीले अंदाज में बताया जा रहा है ताकि लोग कोरोना से डरे नही बल्कि बचाव कर उसका सामना कर उसे मात दे सके।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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