इंदौर में नेग के लिए किन्नरों का हंगामा, बुटीक संचालिका ने बुलाई पुलिस

इंदौर में नेग के लिए किन्नरों का हंगामा, बुटीक संचालिका ने बुलाई पुलिस

इंदौर| आकाश धोलपुरे| इंदौर के पलासिया थाना क्षेत्र में किन्नरों ने एक बार फिर हंगामा खड़ा कर दिया है। दरअसल विवाद की वजह है आने वाले समय में रक्षाबंधन का त्योहार है जिसके नेग को लेकर हंगामा खड़ा हो गया और इसी के चलते किन्नर नेग मांगने पहुंचे एक बुटीक पर पहुंचे थे। नेग की राशि नही मिलने पर किन्नरों ने जमकर उत्पात मचाया और इस पूरे मामले को ना सिर्फ बुटीक संचालिका ने मोबाइल ने कैद किया बल्कि सारा मामला सीसीटीवी में भी कैद हो गया है।

हंगामे का मामाला इंदौर के पलासिया थाना क्षेत्र का है जहां कल बुटीक संचालिका अपनी दुकान खोलने पहुंची थी। पूजा राठौर नामक महिला अपने बुटीक को बस शुरू ही रही थी कि उसी दौरान आधा दर्जन से अधिक किन्नरों का दल नेग के लिए पहुंच गया जब पूजा ने उन्हें डेढ़ सौ रुपए देने की कोशिश की तो उन्होंने इंकार कर दिया और 11 सौ रुपए की मांग करने लगे। नहीं देने पर किन्नरों ने जमकर हंगामा किया यहां तक की निर्वस्त्र भी हो गए पूरी घटना की जानकारी पूजा ने थाने पर दी। उसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने हंगामा शांत कराकर महिला से आवेदन लिया है और कार्रवाई की बात भी की है। हालांकि मामला यहां तक पहुंचने के बाद सवाल ये उठता है कि वैसे ही लोगो की मुश्किलें बढ़ी हुई है ऐसे में नेग जैसे चीजे कैसे पूरी की जाए। इस मामले के सामने आने के बाद अब प्रशासन और सरकार को नई योजना बनाने की आवश्यकता है ताकि आम लोगो के लिए मुश्किलें न पैदा हो।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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