इंदौर में कोरोना संकट के बीच गांधी नगर में पानी पर विवाद, जमकर चले लात-घूंसे , 8 गिरफ्तार

इंदौर में कोरोना संकट के बीच गांधी नगर में पानी पर विवाद, जमकर चले लात-घूंसे , 8 गिरफ्तार

इंदौर/आकाश धोलपुरे

इंदौर में कोरोना संकट के बीच शहर के गांधी नगर क्षेत्र की नैनोद मल्टी में एक बड़ा विवाद सामने आया है। विवाद के दौरान दो पक्षों में जमकर लात घूंसे चले और पत्थरबाजी भी हुई। इसी के चलते महिलाओं सहित कई लोगो को चोंटे भी आई है। पुलिस ने घटना की जानकारी सामने आने के बाद 8 लोगो को गिरफ्तार किया है।

जानकारी के मुताबिक मंगलवार रात को विवाद की शुरुआत हुई थी और एक पक्ष के युवक के रेलिंग क्रॉस करने की बात पर दूसरे पक्ष ने आपत्ति ली थी। इसके बाद बुधवार सुबह फिर पानी भरने के दौरान दोनों पक्ष फिर आमने सामने हो गए और विवाद इतना बढ़ गया कि लोग एक दूसरे को जमकर पीटने लगे। बात इतने पर ही नहीं रुकी, बल्कि दोनों पक्षो ने हंगामे के बीच एक दूसरे के घरों पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिये। घटना इंदौर के गांधी नगर थाना क्षेत्र में स्थित नैनोद मल्टी की बताई जा रही है। घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें लोग भगदड़ मचाकर एक दूसरे पर हमला करते नजर आ रहे है। इस दौरान लोग खुलेआम सोशल डिस्टेंसिंग की अवहेलना करते भी नजर आए।

बात बढ़ने के बाद जब पुलिस को इसकी जानकारी मिली तो पुलिस ने 8 लोगो को गिरफ्तार कर लिया है। गांधी नगर थाना प्रभारी संजय सिंह बैस ने बताया कि नैनोद मल्टी में दो पक्षो में विवाद हुआ है जिसमे एक पक्ष में विकास, गणेश, ईश्वर, रामदास और दीपक है वही दूसरे पक्ष में संदीप, विठ्ठल और गोलू है। पुलिस को पूछताछ में पता चला है कि दोनों पक्षों में मूल रूप से पानी भरने की बात को लेकर विवाद हुआ था जिसमे ये बात सामने आई कि ईश्वर नामक युवक पानी का वितरण ठीक ढंग से नही करता है जिसके चलते विवाद ने बड़ा रूप ले लिया। पुलिस ने सभी 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर उन पर विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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