जबलपुर के दिव्यांग बच्चों ने दिखाई प्रतिभा, हाथों से बनाए दीयों से रोशन करेंगे घर

जबलपुर के दिव्यांग बच्चे अपनी मेहनत और हुनर से इस दीपावली को खास बना रहे हैं। वे अपने हाथों से मिट्टी के दीये और सजावटी सामान तैयार कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रहे हैं।
जबलपुर

दीपावली का पावन त्यौहार खुशियों, उमंग और रोशनी का पर्व है जिसे हर कोई अपने परिवार के साथ बहुत धूमधाम से मनाता है। इस खास मौके पर बाजारों में तरह-तरह की चीजें बिकती हैं, लेकिन जबलपुर से एक बहुत ही दिल को छू लेने वाली और प्रेरणादायक खबर सामने आ रही है।

इस बार शहर के वंदन पुनर्वास एवं अनुसंधान संस्थान के दिव्यांग बच्चे अपने हाथों की मेहनत और हुनर से इस त्यौहार को बेहद खास बना रहे हैं। ये बच्चे मिट्टी के सुंदर दीये और सजावटी सामान तैयार कर रहे हैं जो लोगों को बहुत पसंद आ रहे हैं।

रंगों और खूबसूरत डिजाइनों से सजा रहे मिट्टी के दीये

वंदन संस्थान में पढ़ने वाले ये बच्चे दीपावली से कई हफ्ते पहले ही दीये और सजावट का सामान बनाने की तैयारियों में जुट जाते हैं। शिक्षक और शिक्षिकाएं इन बच्चों को मिट्टी के दीये बनाना, उनमें सुंदर रंग भरना और आकर्षक डिजाइन तैयार करना सिखाते हैं। बच्चे भी पूरे जोश और उत्साह के साथ इन दीयों को सजाते हैं, और उनके बनाए सामान को देखकर हर किसी का दिल खुश हो जाता है।

बच्चों की क्षमता और जरूरत के हिसाब से दिया जा रहा खास और आसान प्रशिक्षण

मध्यप्रदेश शासन से मान्यता प्राप्त इस संस्थान में हर बच्चे की काबिलियत और जरूरत का बहुत अच्छे से ध्यान रखा जाता है। यहां के शिक्षक बच्चों को पढ़ाने और सिखाने के लिए स्पर्श आधारित तरीकों, सांकेतिक भाषा और दूसरे आसान संकेतों का इस्तेमाल करते हैं। दीये बनाने के अलावा बच्चों को कई और हुनर भी सिखाए जाते हैं ताकि वे आगे चलकर खुद पर निर्भर बन सकें।

दीयों की बिक्री से मिलने वाली कमाई से पूरी होती हैं बच्चों की छोटी-छोटी खुशियां

इन बच्चों द्वारा बनाए गए दीयों और सजावटी सामान को जब लोग खरीदते हैं, तो उससे जो पैसे मिलते हैं उनका बहुत ही अच्छा उपयोग किया जाता है। इस कमाई से बच्चों की पढ़ाई लिखाई, उनके लिए मिठाई, नए कपड़े और त्यौहार की दूसरी जरूरतें पूरी की जाती हैं। यही वजह है कि बच्चे बिना किसी थकान के पूरे मन से दीये तैयार करते हैं और अपनी मेहनत पर गर्व महसूस करते हैं।

Bhawna Choubey
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पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ समाज तक पहुंचाने का माध्यम है। तथ्यों की पड़ताल, महत्वपूर्ण मुद्दों को समझना और निष्पक्ष खबरों के जरिए लोगों की आवाज़ बनना मेरी पत्रकारिता की पहचान है। View all posts by Bhawna Choubey →
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