Indore News : प्रधान आरक्षक ने फांसी लगाकर दी जान, कारण पता करने में जुटी पुलिस

Indore News : प्रधान आरक्षक ने फांसी लगाकर दी जान, कारण पता करने में जुटी पुलिस

इंदौर, आकाश धोलपुरे। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र स्थित पुलिस लाइन में एक प्रधान आरक्षक (head constable) ने फांसी लगाकर अपनी जान (suicide) दे दी। पुलिसकर्मी ने फांसी क्यों लगाई इस बात का तो पता नहीं चल पाया है लेकिन वो डिप्रेशन में था इस बात की जानकारी सामने आई है। हालाँकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

जानकारी के अनुसार द्वारिकापुरी थाने में पदस्थ हेड कांस्टेबल मोहन सोलंकी ने रविवार रात अचानक फांसी (head constable suicide) लगा ली। इस बात की जानकारी पुलिस को कोर्ट में पदस्थ उसकी पत्नी ने दी, सूचना के बाद राजेंद्र नगर पुलिस ने मर्ग कायम कर हेड कांस्टेबल के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

मृतक हेड कांस्टेबल के दोस्त और परिजन सुशील लोधिया ने बताया कि मोहन सोलंकी रविवार रात को उसके साथ में  ही था और दोनों ने मिलकर खाना भी खाया था। सुखनिवास इंदौर में रहने वाले मृतक के साथी ने बताया कि रात में वो अच्छी बात कर गया था लेकिन सुबह का उसको पता नहीं है की अचानक क्या हुआ। वह हंसमुख था और रोज की तरह बात कर गया था। उसको किसी प्रकार की चिंता नही थी। उसके दो बच्चे है और मैं उसकी मौसी का लड़का हूँ।

द्वारिकापुरी थाना प्रभारी सतीश द्वेदी ने बताया कि मृतक 35 वर्षीय मोहन सोलंकी उनके थाने में प्रधान आरक्षक के तौर पर पदस्थ था। वो राजेन्द्र नगर थाना क्षेत्र में रहते थे और 3 वर्षों से थाने में पदस्थ थे। उन्होंने बताया कि पिछले साल ही उसे प्रमोशन मिला था। अभी आत्महत्या के पीछे प्रारंभिक तौर पर कोई कारण सामने नहीं आया है क्योंकि कल रात ही वो पड़ोसियों के साथ टहल रहे थे। कल रात को वो अपनी पत्नी के साथ थे और दूसरे कमरे में जाकर उन्होंने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी।

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Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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