
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर बंगाली समुदायों में डर पैदा करने का आरोप लगाया है। सरमा ने गुवाहाटी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ममता बिना कारण एनआरसी का मुद्दा उठा रही हैं, क्योंकि इसका कोई आदेश नहीं दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि ममता आगामी विधानसभा चुनावों के लिए बंगालियों के वोट हासिल करने के लिए यह रणनीति अपना रही हैं। सरमा ने कहा, “पिछले पांच सालों में उन्होंने एनआरसी पर बात नहीं की, लेकिन अब चुनाव नजदीक आने पर यह मुद्दा उठाया जा रहा है।”
ममता बनर्जी ने गुरुवार को झारग्राम में एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्र की डबल इंजन सरकार पर नागरिकता छीनने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वह लोगों को रोहिंग्या बताकर उन्हें हिरासत में भेजने और बांग्लादेश वापस भेजने की साजिश का विरोध करेंगी। ममता ने यह भी कहा कि अगर वोटर लिस्ट से वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए गए, तो वह पूरी दुनिया में इसके खिलाफ प्रदर्शन करेंगी। उन्होंने बीजेपी और चुनाव आयोग पर भी निशाना साधा, यह आरोप लगाते हुए कि आयोग बीजेपी के इशारे पर काम कर रहा है।
एनआरसी के पीछे एक साजिश
ममता ने बुधवार को दावा किया कि एनआरसी के पीछे एक साजिश है और असम में सात लाख लोगों, जिनमें हिंदू बंगाली भी शामिल हैं, को वोटर लिस्ट से हटाया गया है। उन्होंने कहा कि कूच बिहार और अलीपुरद्वार में भारतीय नागरिकों को नोटिस भेजे जा रहे हैं और उन्हें बांग्लादेश भेजने की कोशिश की जा रही है। ममता ने बीजेपी नेता अमित मालवीय के उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग पर कहा, “चाहे मुझे गिरफ्तार करो या गोली मारो, मैं बंगाली भाषा के अपमान के खिलाफ प्रदर्शन करती रहूंगी।”
राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया
इस विवाद ने असम और पश्चिम बंगाल के बीच राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। ममता ने चुनाव आयोग पर बीजेपी के एजेंट के रूप में काम करने का आरोप लगाया और कहा कि उनके दो अधिकारियों को निलंबन का नोटिस मिला है। उन्होंने लोगों से डरने की जरूरत नहीं होने की बात कही, क्योंकि अभी चुनाव में आठ से नौ महीने बाकी हैं। इस बीच, सरमा ने ममता के दावों को खारिज करते हुए इसे केवल चुनावी रणनीति करार दिया।
