खबर का असर: सरकारी वाहन से पत्नी को ड्राइविंग सिखाने वाले एसडीएम को हटाया

खबर का असर: सरकारी वाहन से पत्नी को ड्राइविंग सिखाने वाले एसडीएम को हटाया

रायसेन| दिनेश यादव| लॉक डाउन के बीच सरकारी गाड़ी से पत्नी को ड्राइविंग सिखाना एसडीएम साहब को महंगा पड़ गया| मामला मीडिया में सामने आने के बाद सिलवानी SDM को हटा दिया गया है| एल के खरे अब सिलवानी एसडीएम होंगे| बीते दिन अधिकारी की पत्नी सरकारी वाहन चलाती नजर आई थी, वहीं सवाल पूछे जाने पर एसडीएम ने पत्रकार से बदसलूकी की थी|

दरअसल, मध्यप्रदेश शासन SDM लिखी हुई सरकारी गाड़ी से सिलवानी एसडीएम अनिल जैन की पत्नी ड्राइविंग सीख रही थी| प्रदेश में लॉक डाउन का सख्ती से पालन कराया जा रहा है| लेकिन अधिकारी की पत्नी न सिर्फ सरकार गाड़ी से ड्राइविंग सीख रही थी बल्कि इस दौरान उन्होंने मास्क भी नहीं पहना था|

इस बारे में जब मीडिया एसडीएम साहब से बात करने गई तो बजाय कुछ जवाब देने के वो मीडिया पर ही भड़क उठे, इससे पहले उनकी पत्नी भी बात करने गए पत्रकार से नजरें चुराते हुए सारे मामले पर पर्दा डालते दिखीं। एसडीएम को सरकारी कार्य के लिये आवंटित बोलोरो वाहन क्रमांक एमपी 02 ए.व्ही. 6616 वही सरकारी वाहन है जिसमे बैठकर इस कोरोना संकटकाल में एसडीएम को लोगों की समस्याएं और व्यवस्थाएं देखनी चाहिए। लेकिन ताज्जुब है कि उसी वाहन से उनकी पत्नी ड्राइविंग सीख रही थी। मीडिया कर्मियों ने जब कार का पीछा कर कार को रोका तो मेडम ने बताया कि उनकी कार खराब हो गई इसलिये इस कार में वह बैठी है। जबकि वह उक्त कार को स्वयं ड्राइव कर रही थी। मीडिया जब वीडियो बनाने लगे तो वह कार से उतर कर पीछे की सीट पर बैठ गई| जब इस संबंध में एसडीएम अनिल जैन से बात करना चाही तो उन्होने मीडिया से झल्लाते हुये उनके बंगले का वीडियो बनाने पर खरी खोटी सुनाई और बात करने से इंकार कर दिया।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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