सीएम डॉ. मोहन यादव आज उज्जैन में करेंगे ‘श्रीमहाकाल महोत्सव’ का शुभारंभ, पाँच दिन तक चलेगा कला, संस्कृति, संगीत और शिव आराधना का महापर्व

यह आयोजन उज्जैन की सैंकड़ों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा हुआ है। ऐतिहासिक प्रमाणों के अनुसार, लगभग 2100 वर्ष पूर्व उज्जैन के शासक सम्राट विक्रमादित्य के काल में महाकाल वन में भगवान शिव को समर्पित शिव महोत्सव का आयोजन किया जाता था। उसी प्राचीन और गौरवशाली परंपरा को मकर संक्रांति के पावन अवसर पर एक बार फिर सांस्कृतिक पुनरुत्थान के रूप में जीवंत किया जा रहा है।
Shri Mahakal Mahotsav Ujjain

CM Mohan Yadav

बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में आज से पांच दिवसीय ‘श्रीमहाकाल महोत्सव’ की शुरुआत होने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज शाम सात बजे इसका शुभारंभ करेंगे। यह महोत्सव श्रीमहाकाल महालोक और त्रिवेणी संग्रहालय के प्रांगण में वीर भारत न्यास एवं श्रीमहाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

यह महोत्सव 14 से 18 जनवरी तक चलेगा जहां कला, संस्कृति, संगीत तथा वैचारिक विमर्श का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। इस महोत्सव को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा है कि कला, संस्कृति और विमर्श को समर्पित यह दिव्य महोत्सव हमारी जड़ों एवं मूल्यों से साक्षात्कार कराएगा। महोत्सव के दौरान देश के ख्यातिलब्ध कलाकार शिव आराधना पर आधारित प्रस्तुति देंगे।

 उज्जैन आज से पांच दिवसीय ‘श्रीमहाकाल महोत्सव’

उज्जैन नगरी आज से पांच दिवसीय ‘श्रीमहाकाल महोत्सव’ की साक्षी बनने जा रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव आज शाम इसका शुभारंभ करेंगे। इस समारोह के दौरान उज्जैन की पावन धरती पर आस्था और कला का संगम दिखेगा। उद्घाटन अवसर पर सुप्रसिद्ध गायक शंकर महादेवन अपने पुत्रों सिद्धार्थ और शिवम् के साथ “शिवोऽहम्” थीम पर संगीतमय प्रस्तुति देंगे। इस आयोजन में देश-विदेश के श्रद्धालु, कला प्रेमी और पर्यटकों के शामिल होने की उम्मीद है।

पाँच दिन तक सजेगा कला संस्कृति संगीत और शिवभक्ति का महाकुंभ

महोत्सव के दूसरे दिन 15 जनवरी को मुंबई का प्रसिद्ध द ग्रेट इंडियन क्वायर ‘शिवा’ विषय पर प्रस्तुति देगा। तीसके दिन 16 जनवरी को सुप्रसिद्ध गायिका सोना महापात्रा अपनी संगीतमय प्रस्तुति देंगीं। चौथे दिन 17 जनवरी को इंदौर के श्रेयश शुक्ला एवं मुंबई के विपिन अनेजा और उनके बैंड द्वारा सुगम संगीत का कार्यक्रम होगा। पांचवें और अंतिम दिन 18 जनवरी को महोत्सव का समापन इंडोनेशिया और श्रीलंका के सांस्कृतिक दलों द्वारा भगवान शिव केंद्रित नृत्य-नाटिका के माध्यम से होगा।

मध्यप्रदेश की लोकसंस्कृति और जनजातीय परंपराओं की झलक दिखेगी

महोत्सव के दौरान प्रतिदिन शाम 4 से 6 बजे तक त्रिवेणी संग्रहालय में मध्यप्रदेश की समृद्ध लोकसंस्कृति एवं जनजातीय परंपराओं का प्रदर्शन होगा। इसके अंतर्गत छिंदवाड़ा का भड़म, बैतूल का ठाट्या, धार का भगोरिया और सागर का बरेदी जैसे पारंपरिक नृत्य शामिल हैं। साथ ही हर रोज़ शहर के विभिन्न मार्गों से एक कला यात्रा श्रीमहाकाल महालोक तक निकलेगी, जिसमें शिव बारात, डमरू वादन और मलखंब जैसे आकर्षक कार्यक्रम होंगे। समारोह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ 15 जनवरी को सुबह एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन भी किया जाएगा जिसका विषय “शिव तत्त्व और महाकाल: पुरातिहास, साहित्य और संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में” रखा गया है। यहां उपस्थित विद्वान शिव तत्त्व की दार्शनिक गहराइयों पर विचार विमर्श करेंगे।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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