कोरोना वॉरियर्स शहीद पुलिस अधिकारियों को गृहमंत्री की अनूठी श्रद्धांजलि,आसमान भी छलक पड़ा

कोरोना वॉरियर्स शहीद पुलिस अधिकारियों को गृहमंत्री की अनूठी श्रद्धांजलि,आसमान भी छलक पड़ा

भोपाल

विश्व पर्यावरण दिवस (world environment day) के अवसर पर शुक्रवार को मध्य प्रदेश पुलिस के मुख्यालय में एक अनूठा कार्यक्रम आयोजित किया गया। आमतौर पर इस अवसर पर पौधारोपण (plantation) सामान्य बात है लेकिन मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय में पुलिस निरीक्षक स्तर के दो दिवंगतों की स्मृति में गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा (dr narottam mishra) ने पौधे रोपे और उनकी वीरता को याद किया।

दरअसल कोरोना की जंग लड़ते हुए मध्य प्रदेश पुलिस के उज्जैन के पुलिस निरीक्षक यशवंत पाल और इंदौर के पुलिस निरीक्षक देवेंद्र कुमार चंद्रवंशी की असामयिक मौत हो गई थी। कोरोना महमारी के संकट में वीरगति को प्राप्त हुए इन दोनों शहीदों के अतुलनीय योगदान के लिए उनके कर्तव्य की सराहना करते हुए गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा (dr narottam mishra) ने कहा कि ऐसी आपदा में जब लोग घरों में सुरक्षित हैं तब पुलिस (police) सड़कों पर उसी तरह डटकर काम कर रही है जिस तरह से सीमा पर देश की सेना करती है। डॉ मिश्रा ने इन दोनों शहीदों के अतुलनीय योगदान को याद करते हुए कहा कि कर्तव्य की बलिवेदी पर इन जांबाज़ कर्मचारियों ने जो बलिदान दिया है उसे याद रखना होगा और हमें इस आपदा की विषम परिस्थिति में जनसेवा का अनूठा संदेश देकर यह दोनों पुलिसकर्मी अमर हो गए हैं । गृह मंत्री के द्वारा पौधारोपण करने के थोड़ी देर बाद ही आसमान से इंद्रदेव ने बारिश के रूप में अपनी श्रद्धांजलि इन दोनों पुलिसकर्मियों को अर्पित की । इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी और विशेष सशस्त्र बल के पुलिस महानिदेशक विजय यादव भी मौजूद थे।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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