विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर, अरबी, फारसी और उर्दू के एकवर्षीय पाठ्यक्रम के लिए प्रवेश शुरू, 28 फरवरी फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि

कोर्स की किताबें निःशुल्क दी जायेंगी। सभी कोर्सेस के प्रवेश पत्र सीमित हैं, प्रवेश पत्र समाप्त होने की स्थिति में उसकी छाया प्रति स्वीकार नहीं की जायेगी।
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अरबी, फारसी और उर्दू भाषा सीखने के इच्छुक युवाओं के लिए अच्छी खबर है, वे इसमें एक वर्षीय प्रमाणपत्र और डिप्लोमा कोर्स कर अपना करियर बना सकते हैं, प्रवेश प्रर्किया शुरू हो गई है, वे फॉर्म भरकर किसी भी कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं।

मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी संस्कृति परिषद की निगरानी में चल रहे राष्ट्रीय उर्दू भाषा एवं विकास परिषद, नई दिल्ली के एक वर्षीय प्रमाण-पत्र अरबी भाषा, फारसी (परशियन) कोर्स एवं उर्दू डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश प्रारम्भ हो गये हैं। अरबी, फारसी और उर्दू भाषा सीखने के इच्छुक इस पाठयक्रम में प्रवेश प्राप्त कर सकते हैं। प्रवेश पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 28 फरवरी, 2026 है।

एडमिशन लेने वाले विद्यार्थियों के लिए जरूरी शर्तें 

  • अरबी कोर्स में प्रवेश के लिये उर्दू एवं अंग्रेजी की प्रारम्भिक शिक्षा के अतिरिक्त उर्दू लिखने और समझने का ज्ञान भी आवश्यक है।
  • फारसी कोर्स में प्रवेश के लिये उर्दू एवं अंग्रेजी लिखने और पढ़ने का ज्ञान आवश्यक है।
  • उर्दू डिप्लोमा कोर्स के लिये हिन्दी या अंग्रेजी का ज्ञान आवश्यक है।
  • तीनों पाठ्यक्रमों में आयु सीमा की भी कोई सीमा निर्धारित नहीं है।

निःशुल्क मिलेंगी किताबें, 1 अप्रैल से शुरू होंगी क्लास 

निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी ने बताया कि प्रवेश के लिये प्रति कोर्स 200 रुपये पंजीयन शुल्क (कार्म लेने पर भुगतान करना होंगे) जमा करना होगा। इसके अतिरिक्त अन्य कोई फीस नहीं ली जायेगी। कोर्स की किताबें निःशुल्क दी जायेंगी। सभी कोर्सेस के प्रवेश पत्र सीमित हैं, प्रवेश पत्र समाप्त होने की स्थिति में उसकी छाया प्रति स्वीकार नहीं की जायेगी। प्रवेश पत्र मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी के कार्यालय, मुल्ला रमूजी संस्कृति भवन, बाणगंगा रोड, भोपाल में कार्यालय समय में प्राप्त एवं जमा किये जा सकते हैं। उपरोक्त कोर्सेस की कक्षायें 01 अप्रैल, 2026 से आवश्यक रूप से प्रारम्भ हो जायेंगी।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
Atul Saxena

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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