भोपाल-जबलपुर नेशनल हाईवे पर 400 करोड़ की लागत से बने ओवरब्रिज का बड़ा हिस्सा ढहा, कमलनाथ ने सरकार से की उच्चस्तरीय जांच की मांग

पूर्व मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य में लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि जनता की सुरक्षा और सार्वजनिक धन की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब जिम्मेदारी तय करने और सिर्फ आश्वासनों के बजाय ठोस कदम उठाने का समय आ गया है।
Kamal Nath

Kamal Nath

भोपाल-जबलपुर नेशनल हाईवे-45 पर बने लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत वाले ओवरब्रिज का एक हिस्सा ढह जाने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कमलनाथ ने इस घटना को सिर्फ निर्माण विफलता नहीं बल्कि सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की गहरी खाई बताया है। उन्होंने कहा कि जिस पुल को विकास का प्रतीक बताया गया था, वही तीन साल के भीतर मलबे में तब्दील होकर निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

बता दे कि इस ओवरब्रिज का करीब 200 मीटर हिस्सा गिर गया है। जिस लेन में पिछले लगभग छह महीनों से मरम्मत कार्य चल रहा था, वही हिस्सा धराशायी हुआ। कमलनाथ ने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि संरचना में पहले से ही खामी मौजूद थी, इसके बावजूद यातायात जारी रखा गया,जो प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने इस घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

नेशनल हाईवे पर बने ओवरब्रिज का हिस्सा ढहा, कमलनाथ ने सरकार को घेरा

जबलपुर में नेशनल हाईवे-45 (भोपाल-जबलपुर मार्ग) पर शहपुरा के पास रेलवे ओवरब्रिज का एक बड़ा हिस्सा रविवार शाम ढह गया। यह घटना विकास और बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। इसे लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार को घेरा है। कमलनाथ ने कहा है कि तीन साल पहले निर्मित इस परियोजना की गुणवत्ता अब संदेह के घेरे में है। इतने कम समय में पुल का ढहना या तो निर्माण में भारी अनियमितता को दर्शाता है या निगरानी तंत्र की विफलता को। उन्होंने मांग की कि निर्माण एजेंसी, गुणवत्ता परीक्षण और मरम्मत कार्य के दौरान अपनाए गए सुरक्षा मानकों की विस्तृत जांच कराई जाए।

मामले की जांच की मांग

पूर्व सीएम ने कहा कि घटनास्थल से करीब 50 मीटर की दूरी पर रेलवे ट्रैक गुजरता है। यदि मलबा रेलवे लाइन पर गिरता या उसी समय कोई ट्रेन गुजर रही होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। इस स्थिति को उन्होंने बेहद गंभीर बताते हुए जिम्मेदारी तय करने की मांग की। कमलनाथ ने कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि 400 करोड़ रुपये की परियोजना की निगरानी किसके अधीन थी और अब तक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि यह घटना सिर्फ एक पुल के ढहने की नहीं बल्कि व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा मामला है। यदि बुनियादी ढांचा तीन वर्ष में ही कमजोर साबित हो जाए तो विकास के दावों की गंभीर समीक्षा आवश्यक हो जाती है। उन्होंने सरकार से उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मजबूत तंत्र विकसित करने की मांग की है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
Follow Us :GoogleNews