बड़ी राहत: मप्र में आज से खोली जा सकेंगी ग्रामीण क्षेत्रों की सभी दुकानें

बड़ी राहत: मप्र में आज से खोली जा सकेंगी ग्रामीण क्षेत्रों की सभी दुकानें

भोपाल| कोरोना (Corona) संकट के चलते मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh)में 25 मार्च से जारी लॉक डाउन (Lockdown) के बीच सरकार ने बड़ी राहत दी है| आज से ग्रामीण क्षेत्रों में सभी दुकानें खोली जा सकेंगी| मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं| उन्होंने कहा कि वे सभी ग्रामीण क्षेत्र जो कंटेन्मेंट एरिया में नहीं आते, उन्हें छोड़कर सभी ग्रामीण क्षेत्रों में दुकानें खोल दी जाएंगी|

सीएम शिवराज ने कहा शहरी क्षेत्रों में मुख्य बाज़ार को छोड़कर केवल आवश्यक वस्तुओं की दुकानें मोहल्लों में खुलेंगी। मॉल, सिनेमाघर, ब्यूटीपार्लर, जिम, होटल खोलने की अनुमति नहीं होगी। नागरिकों की सुरक्षा की दृष्टि से इंदौर, भोपाल, उज्जैन, जबलपुर, धार एवं खरगोन में अभी दुकानें नहीं खोली जाएंगी। उन्होंने बताया कंटेन्मेंट एरिया और हॉटस्पॉट के बाहर दुकान खोलने का निर्णय ज़िला प्रशासन और क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप लेगा।

गौरतलब है कि प्रदेश कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार ने लॉक डाउन को आगे बढ़ा दिया था| इस बीच जरूरी सेवाएं छोड़कर सभी दुकानें बंद रही| अब सरकार ने बड़ी राहत देते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में दुकानें खोलने के लिए निर्देश दे दिए हैं| हालाँकि इस दौरान ग्राहक और दुकानदारों को नियमों का पालन करना होगा| सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा| सार्वजानिक स्थानों पर मास्क लगाना अनिवार्य किया गया है|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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