डिप्टी सेक्रेटरी की संदिग्ध हालात में मौत, घर में थे बंद, दरवाजा तोड़कर निकाला गया शव

डिप्टी सेक्रेटरी की संदिग्ध हालात में मौत, घर में थे बंद, दरवाजा तोड़कर निकाला गया शव

भोपाल,डेस्क रिपोर्ट

आदिम जाति कल्याण विभाग में डिप्टी सेक्रेटरी लखन सिंह टेकाम की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। सोमवार शाम उनका शव बागमुगालिया स्थित उनके डुप्लेक्स में मिला। कुछ दिनों से उनकी पत्नी से बातचीत नहीं हो रही थी। इस दौरान कमरे के बाहर रखी खाने की थाली नहीं उठी तो पत्नी को किसी अनहोनी का अंदेशा हुआ। दरवाजा तोड़ने पर लखन सिंह टेकाम का शव मिला। पुलिस के मुताबिक उनकी मौत दो दिन पहले ही हो चुकी थी। डिप्टी कलेक्टर रैंक के अधिकारी लखन सिंह टेकाम कुछ समय पहले ही अपने चार इमली के सरकारी आवास से यहां डुप्लेक्स में रहने आए थे।

जानकारी के मुताबिक यह डुप्लेक्स उन्होने कुछ समय पहले ही खरीदा था जहां उनकी पत्नी ज्योति टेकाम और उनका ग्यारह साल का बेटा साथ में रहता था। ये भी कहा जा रहा है कि पत्नी और बच्चा नीचे वाले फ्लोर में रहते थे और लखन टेकाम ऊपर वाले फ्लोर में रहा करते थे। पेबल वे कॉलोनी निवासी 56 वर्षीय लखन सिंह राखी के बाद से दफ्तर भी नहीं जा रहे थे और खबरों के मुताबिक उन्हें शराब पीने की आदत थी। इसी कारण पति-पत्नी में कुछ दिनों से बातचीत बंद थी। पत्नी के अनुसार वो रोजाना उनके कमरे के बाहर खाना रख देती थी लेकिन दो दिन से उन्होने खाने की थाली नहीं उठाई तो उन्हें शंका हुई। इसके बाद  सोमवार को पत्नी ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने पहुंचकर दरवाजा तोड़ा तो अंदर उनका शव मिला। शुरूआती जांच में पुलिस का कहना है कि उनके शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं है लेकिन मौत की असल वजह पोस्टमार्टम के बाद ही पता चल पाएगी।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews