
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गणेश चतुर्थी पर प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी है। इसी के साथ उन्होंने सभी से स्वदेशी विचार के साथ इस पर्व को मनाने का आह्वान किया है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए मिट्टी और गोबर से बनी पर्यावरण हितैषी गणेश प्रतिमाओं का उपयोग करने की बात कही है।
सीएम ने कहा कि गणेश चतुर्थी सिर्फ धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का अवसर भी है। उन्होंने अपील की कि सभी लोग इस बार मिट्टी और गोबर से बनी इको-फ्रेंडली प्रतिमाओं का पूजन करें। उन्होंने कहा कि गणेशोत्सव पर हम गोबर और मिट्टी से बनी प्रतिमाओं का प्रयोग कर प्रदूषण कम कर सकते हैं और प्रकृति की रक्षा कर सकते हैं।
गणपति बप्पा मोरया
श्रीगणेश को हिंदू धर्म में प्रथम पूज्य देवता कहा जाता है और वे सभी शुभ कार्यों की शुरुआत में पूजे जाते हैं। उन्हें विघ्नहर्ता और सिद्धिदाता माना जाता है। गणेश जी से जुड़ी कई पौराणिक व धार्मिक कथाएं हैं जो शिव पुराण, पद्म पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण, स्कंद पुराण और अन्य ग्रंथों में वर्णित हैं। आज गणेश चतुर्थी के अवसर पर उनसे जुड़ी कुछ धार्मिक-पौराणिक कथाएं और गणपति बप्पा की विशेषताएं जानते हैं।
पौराणिक कथाओं में प्रथम पूजा का आशीर्वाद
शिव पुराण और ब्रह्म वैवर्त पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, एक बार देवताओं के बीच यह विवाद हुआ कि प्रथम पूजा का अधिकार किसे मिलना चाहिए। इस विवाद को सुलझाने के लिए एक प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें सभी देवताओं को तीनों लोकों की परिक्रमा कर जल्द से जल्द लौटना था। जो सबसे पहले आता वही विजेता होता। सारे देवता तीन लोक की परिक्रमा पर निकल गए, लेकिन श्रीगणेश ने तीन लोक की परिक्रमा करने की बजाय अपने माता-पिता शिवजी और माता पार्वती की परिक्रमा कर ली। उन्होंने कहा कि माता-पिता ही मेरे लिए संपूर्ण जगत हैं। उनकी इस बुद्धिमत्ता और भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें प्रथम पूज्य प्रथम देवता का वरदान दिया। इसीलिए हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य, यज्ञ, या पूजा की शुरुआत में गणेश जी की पूजा सबसे पहले की जाती है।
विघ्नहर्ता और सिद्धिदाता श्रीगणेश
गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है, क्योंकि वे सभी बाधाओं को दूर करते हैं। साथ ही वे सिद्धिदाता भी हैं जो विभिन्न कार्यों में सफलता प्रदान करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले उनकी पूजा करने से कार्य निर्विघ्न और सफल होता है। इस विश्वास के कारण हिंदू परंपरा में कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, या व्यापार शुरू करने से पहले गणेश जी की पूजा अनिवार्य मानी जाती है।
बुद्धि और ज्ञान के देवता
गणेश जी को बुद्धि, विवेक और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। उनका विशाल मस्तक बुद्धिमत्ता का प्रतीक है और मान्यता है कि वे अपने भक्तों को सही निर्णय लेने की शक्ति देते हैं। महाभारत में गणेश जी ने वेदव्यास के सहायक के रूप में महाभारत को लिखने का कार्य किया, जो उनकी विद्या और बौद्धिकता को दर्शाता है। इसीलिए किसी भी कार्य की शुरुआत में उनकी पूजा से बुद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है।
सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा
हिंदू धर्म में गणेश जी को सभी गणों (शिवजी के अनुयायियों) का स्वामी माना जाता है। मान्यतानुसार उनकी पूजा से सभी देवता और गण प्रसन्न होते हैं। यह परंपरा विशेष रूप से महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में गणेश चतुर्थी के दौरान विशेष रूप से देखी जाती है। गणेश जी की मूर्ति स्थापना और पूजा से भक्तों में यह विश्वास और गहरा हो जाता है कि वे हर कार्य को सुचारु रूप से शुरू करने में उनकी सहायता करते हैं।
जय गणेश!
आइए, स्वदेशी विचार के साथ हर्षोल्लास से मनाएं गणेश चतुर्थी…#GaneshChaturthi pic.twitter.com/EO287kLpzU
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) August 26, 2025
पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

