आदिम-जाति कल्याण विभाग की शालाओं के संचालन को लेकर गाइडलाइन जारी

school holiday 2026

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| आदिम-जाति कल्याण विभाग की शालाओं को शैक्षणिक सत्र 2020-21 में सत्र शुरू करने और शालाओं के संचालन के संबंध में विभाग द्वारा दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं। बोर्ड की परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए कक्षा-10वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों के लिये विद्यालय नियमित रूप से पूरे निर्धारित समय तक के लिये संचालित होंगे।

विद्यालयों में विद्यार्थियों को इस प्रकार से आमंत्रित किया जायेगा, कि विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या एक-साथ अधिक न हो। विद्यालय में विद्यार्थियों की उपस्थिति अनिवार्य नहीं होगी। यह माता-पिता अथवा अभिभावकों की सहमति पर निर्भर करेगा। विद्यार्थी के लिये दी गई सहमति पूरे सत्र के लिये मान्य होगी। कक्षा-9वीं एवं 11वीं के लिये विद्यार्थियों की दर्ज संख्या एवं उपलब्ध अध्यापन कक्ष के आधार पर प्राचार्य द्वारा स्थानीय स्तर पर कक्षाओं के संचालन के संबंध में निर्णय लिया जा सकेगा। समय-समय पर जारी विभागीय आदेश अनुसार ऑनलाइन अथवा दूरस्थ शिक्षण अध्यापन की पद्धति के रूप में बना रहेगा। जो विद्यार्थी विद्यालय की अपेक्षा ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से पढ़ना चाहते हैं, उन्हें ऐसा करने की अनुमति दी जायेगी।

विभाग द्वारा विभागीय विद्यालयों में शैक्षणिक तथा गैर-शैक्षणिक स्टाफ को शत-प्रतिशत उपस्थित रहने के निर्देश जारी किये गये हैं। आदिम-जाति कल्याण विभाग के छात्रावास एवं आवासीय विद्यालयों के छात्रावासों को खोले जाने की अनुमति नहीं होगी। आवासीय विद्यालयों को डे-स्कूल के रूप में खोला जा सकेगा। यदि विद्यालय द्वारा परिवहन सुविधा का प्रबंध किया जा रहा है, तो वाहनों में समुचित भौतिक दूरी सुनिश्चित की जायेगी और सेनेटाइजेशन की पर्याप्त व्यवस्था की जायेगी।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews