गर्मी आने तक चलेगा हनुवंतिया जल महोत्सव ,पहले 15 फरवरी को खत्म होना था महोत्सव

गर्मी आने तक चलेगा हनुवंतिया जल महोत्सव ,पहले 15 फरवरी को खत्म होना था महोत्सव

भोपाल।

खंडवा जिले केपर्यटन स्थल हनुवंतिया टापू पर चौथा जल महोत्सव को एख फिर बढ़ाई गई है। पहले यह महोत्सव तीन जनवरी से शुरु होकर तीन फरवरी तक को ख्तम होना था। लेकिन मौसम में बदलाव के कारण इस महोत्सव के खत्म होने की तारीख पंद्रह फरवरी तक बढ़ाई गई। लेकिन अब यह तब तक चलेगा, जब तक मौसम साथ देगा। गर्मी आने के बाद ही ही इसका समापन होगा। मुख्यमंत्री कमल नाथ ने तीन जनवरी को हनुवंतिया में चौथे जल महोत्सव का शुभारंभ किया था। सरकार ने पूरे प्रयास किए थे कि इस बार का आयोजन पिछले तीन आयोजनों से हटकर हो।

लोगो में नहीं दिखी दिलचस्पी

इस बार के जल महोत्सव में लोगों की दिलचस्पी नही दिख रही है। इस बार करीब डेढ़ लाख पर्यटक ही हनुवंतिया पहुंचे हैं, जबकि दो साल पहले तीसरे आयोजन में करीब ढाई लाख पर्यटक पहुंचे थे। इस बार आयोजन को लेकर पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं हुआ।यदि यह आयोजन दिसंबर में शुरू होता तो लोगो को ज्यादा दिलचस्पी होती। इस का कारण यह भी है कि इसके पैकेज महंगे है, जिसमें पहला 12 हजार और दूसरा साढे 8 हजार का है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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