हिरण बैगा नक्सली था या नहीं, इस मुद्दे पर खुद के जवाब से मुसीबत में सरकार! कांग्रेस ने किया सदन से वाकआउट

मंडला में हिरण बैगा की पुलिस मुठभेड़ में मौत को लेकर विपक्ष लगातार मध्य प्रदेश सरकार पर आरोप लग रहा है। मामले को लेकर सरकार का कहना है कि जांच पड़ताल जारी है। इसके बाद ही सब कुछ साफ हो पाएगा।
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मंडला में हिरण बैगा की पुलिस मुठभेड़ में मौत मध्य प्रदेश सरकार के लिए गले की हड्डी बन गई है। दरअसल, इस मौत को लेकर विपक्ष सरकार पर आदिवासी की हत्या का आरोप लगा रहा है। वहीं, सरकार का कहना है कि जांच के बाद सब साफ हो जाएगा। हालांकि, सरकार ने विधानसभा में कहा है कि वह यानि हिरण बैगा नक्सली समर्थक था जबकि आईजी उसे नक्सली बता चुके हैं।

विक्रांत भूरिया ने उठाया सवाल

मंगलवार को मध्य प्रदेश विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से मंडला जिले में हिरण बैगा नामक आदिवासी की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत का मामला उठा। कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि सरकार आदिवासियों की हत्या कर रही है। उन्हें जल, जंगल, जमीन से बेदखल कर रही है। अपने साथ मात्र एक कुल्हाड़ी और थोड़ा सामान लेकर जाने वाले हिरण बैगा को पुलिस मुठभेड़ में नक्सली बताकर मार दिया गया। विक्रांत ने सरकार पर आरोप लगाते हुए इस पूरे मामले की रिटायर्ड जज के माध्यम से जांच करने की मांग की।

मंत्री नरेंद्र पटेल का जवाब

इसके जवाब में मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि वास्तव में हिरण बैगा नक्सलियों का हेल्पर था और उन्हें सूचनाओं पहुंचा कर सतर्क करता था। पुलिस ने जब आमने-सामने की मुठभेड़ में उसे ललकारा तो सामने से फायरिंग हुई और जिसमें हिरण बैगा मारा गया।

विधायक ने सरकार को घेरा

इसके बाद कांग्रेस विधायक नारायण सिंह पट्टा ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए बैगा आदिवासी की मौत को पुलिस की हत्या बताया और कहा कि वह बिल्कुल निर्दोष था। विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने तमाम सवाल उठाते हुए प्रश्नों की झड़ी लगा दी और मृतक हिरण बैगा के परिजनों के लिए सरकारी नौकरी सहित 2 करोड रुपए की राशि की मांग की।

इस पर मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि हिरण बैगा के परिजनों के लिए मुख्यमंत्री के द्वारा 10 लाख रुपए दिए जा चुके हैं और यदि जांच में वह नक्सली साबित नहीं हुआ तो उसके परिवार को नौकरी और एक करोड रुपए, दोनों दिए जाएंगे। पूर्व गृहमंत्री और कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने भी मृतक हिरण बैगा के परिजनों के लिए सरकारी नौकरी और एक करोड रुपए की राशि की मांग की।

उमंग सिंघार ने घेरा

इसके बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सवाल करते हुए कहा कि यदि हिरण बैगा नक्सली था तो फिर सरकार ने 10 लाख रुपए की सहायता राशि क्यों दी और यदि वह नक्सली नहीं है तो एक करोड रुपए और सरकारी नौकरी देने में क्या परेशानी है। सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने इस मुद्दे पर सदन से वाकआउट किया।

मानवाधिकार आयोग के दखल के बाद जांच के निर्देश

इस पूरे मामले में जिस तरह से राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के निर्देश पर जांच के आदेश दिए गए हैं। ऐसा लगता है कि मामला जल्द सुलझने वाला नहीं और राष्ट्रीय स्तर पर भी यह सुर्खियों में रहेगा।

Sanjucta Pandit
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सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.

मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit →
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