
मंडला में हिरण बैगा की पुलिस मुठभेड़ में मौत मध्य प्रदेश सरकार के लिए गले की हड्डी बन गई है। दरअसल, इस मौत को लेकर विपक्ष सरकार पर आदिवासी की हत्या का आरोप लगा रहा है। वहीं, सरकार का कहना है कि जांच के बाद सब साफ हो जाएगा। हालांकि, सरकार ने विधानसभा में कहा है कि वह यानि हिरण बैगा नक्सली समर्थक था जबकि आईजी उसे नक्सली बता चुके हैं।
विक्रांत भूरिया ने उठाया सवाल
मंगलवार को मध्य प्रदेश विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से मंडला जिले में हिरण बैगा नामक आदिवासी की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत का मामला उठा। कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि सरकार आदिवासियों की हत्या कर रही है। उन्हें जल, जंगल, जमीन से बेदखल कर रही है। अपने साथ मात्र एक कुल्हाड़ी और थोड़ा सामान लेकर जाने वाले हिरण बैगा को पुलिस मुठभेड़ में नक्सली बताकर मार दिया गया। विक्रांत ने सरकार पर आरोप लगाते हुए इस पूरे मामले की रिटायर्ड जज के माध्यम से जांच करने की मांग की।
पूरे देश में सोचे कि कितने आदिवासियों को फ़र्ज़ी नक्सली बताकर मारा गया है । मंडला में आदिवासी युवक का फ़र्ज़ी एनकाउंटर इसका ताज़ा उदाहरण है !#FakeEncounter #JusticeForTribals #Mandla https://t.co/Gh5nrDy1ci
— Dr.Vikrant Bhuria (@VikrantBhuria) March 17, 2025
मंत्री नरेंद्र पटेल का जवाब
इसके जवाब में मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि वास्तव में हिरण बैगा नक्सलियों का हेल्पर था और उन्हें सूचनाओं पहुंचा कर सतर्क करता था। पुलिस ने जब आमने-सामने की मुठभेड़ में उसे ललकारा तो सामने से फायरिंग हुई और जिसमें हिरण बैगा मारा गया।
विधायक ने सरकार को घेरा
इसके बाद कांग्रेस विधायक नारायण सिंह पट्टा ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए बैगा आदिवासी की मौत को पुलिस की हत्या बताया और कहा कि वह बिल्कुल निर्दोष था। विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने तमाम सवाल उठाते हुए प्रश्नों की झड़ी लगा दी और मृतक हिरण बैगा के परिजनों के लिए सरकारी नौकरी सहित 2 करोड रुपए की राशि की मांग की।
इस पर मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि हिरण बैगा के परिजनों के लिए मुख्यमंत्री के द्वारा 10 लाख रुपए दिए जा चुके हैं और यदि जांच में वह नक्सली साबित नहीं हुआ तो उसके परिवार को नौकरी और एक करोड रुपए, दोनों दिए जाएंगे। पूर्व गृहमंत्री और कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने भी मृतक हिरण बैगा के परिजनों के लिए सरकारी नौकरी और एक करोड रुपए की राशि की मांग की।
उमंग सिंघार ने घेरा
इसके बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सवाल करते हुए कहा कि यदि हिरण बैगा नक्सली था तो फिर सरकार ने 10 लाख रुपए की सहायता राशि क्यों दी और यदि वह नक्सली नहीं है तो एक करोड रुपए और सरकारी नौकरी देने में क्या परेशानी है। सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने इस मुद्दे पर सदन से वाकआउट किया।
आदिवासियों पर अत्याचार बंद करो!!!
पीड़ित परिवार को न्याय दो!!
निर्दोषों को मरना बंद करो!!आज मंडला के आदिवासी एनकाउंटर मामले में पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग करते हुए, कांग्रेस विधायकों के साथ वॉकआउट किया।
.@INCIndia @INCMP pic.twitter.com/Hvg0afosYH— Umang Singhar (@UmangSinghar) March 18, 2025
मानवाधिकार आयोग के दखल के बाद जांच के निर्देश
इस पूरे मामले में जिस तरह से राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के निर्देश पर जांच के आदेश दिए गए हैं। ऐसा लगता है कि मामला जल्द सुलझने वाला नहीं और राष्ट्रीय स्तर पर भी यह सुर्खियों में रहेगा।
सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.



