MP में इंजेक्शन और टीकों की गुणवत्ता जांच पर कमलनाथ ने उठाए सवाल, कहा “जनता की जान से किया जा रहा खुला खिलवाड़”

उन्होंने कहा कि पिछले पंद्रह सालों से दवाओं की गुणवत्ता जांच लगभग ठप है और राज्य में इंजेक्टेबल दवाओं की जांच के लिए पर्याप्त सरकारी लैब तक उपलब्ध नहीं हैं। पूर्व सीएम ने कहा कि सैंपल दूसरे राज्यों में भेजने से रिपोर्ट आने में महीनों लग जाते हैं, जबकि इस दौरान वही संदिग्ध दवाएं मरीजों को दी जाती रहती हैं। उन्होंने कहा कि यह लापरवाही नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित अपराध है।
Kamal Nath

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पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मध्यप्रदेश में इंजेक्शनों और टीकों की गुणवत्ता जांच को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए राज्य सरकार पर जनता की जान के साथ “खुला खिलवाड़” करने का आरोप लगाया है। स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि व्यवस्था सुधारने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन नतीजा सिफर है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि कुछ हो रहा है, वह किसी प्रशासनिक चूक का मामला नहीं है, बल्कि जनता की जान से किया जा रहा सिस्टमैटिक खिलवाड़ है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों से राज्य में इंजेक्शन और टीकों की गुणवत्ता जांच लगभग बंद हो चुकी है, जिससे दवाओं की सुरक्षा और प्रभाव सुनिश्चित करने की व्यवस्था समाप्त हो गई है।

कमलनाथ ने इंजेक्शन और टीकों की गुणवत्ता जांच के मुद्दे पर सरकार को घेरा

कमलनाथ ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा है कि राज्य की सरकारी प्रयोगशालाओं में इंजेक्टेबल दवाओं की जांच की सुविधा मौजूद नहीं है और सरकार अब दूसरे राज्यों पर निर्भर है जहां सैंपल भेजने के बाद रिपोर्ट आने में दो से तीन महीने तक का समय लग जाता है। इस दौरान संदिग्ध दवाइयां अस्पतालों में इस्तेमाल होती रहती हैं जिनका असर मरीजों पर कैसा असर  पड़ रहा है, इसकी कोई जानकारी नहीं होती।  उन्होंने कहा कि जब तक सैंपल फेल होने की पुष्टि होती है, तब तक दवाएं सैकड़ों लोगों के शरीर में पहुंच चुकी होती हैं और न कोई जवाबदेही तय होती है, न किसी मंत्री या अधिकारी ने जिम्मेदारी लेता है। उन्होंने इस देरी और लापरवाही को “एक व्यवस्थित अपराध” करार दिया है।

बीजेपी पर लगाए आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने के दावों के बावजूद 15 वर्षों बाद न तो आधुनिक लैब बनी और न ही परीक्षण की सुविधाएं शुरू हुईं। उन्होंने सवाल किया कि “अगर व्यवस्था नहीं बनी, तो पैसा आखिर गया कहाँ?” कमलनाथ ने यह आरोप भी लगाया कि बीजेपी सरकार बड़े-बड़े अस्पतालों के उद्घाटन और ‘स्वास्थ्य क्रांति’ के दावों के बावजूद, उन अस्पतालों में उपयोग हो रही दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने से बचती है क्योंकि जांच होने पर नकली दवा, मेडिकल माफिया और सत्ता के रिश्तों का मामला उजागर हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इंजेक्शनों और टीकों की नियमित जांच न होने से गरीब, किसान, महिला और बच्चों की जान खतरे में है और सरकार की मौन प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि उसके लिए सत्ता अहम है, जनता की जान नहीं।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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