शराब दुकान खोलने को लेकर आमने सामने ठेकेदार-सरकार, हाईकोर्ट जाने की चेतावनी

शराब दुकान खोलने को लेकर आमने सामने ठेकेदार-सरकार, हाईकोर्ट जाने की चेतावनी

भोपाल

“एमपी अजब है सबसे गजब है” यह लाइनें प्रदेश (M.P.) में शराब (liquor) दुकानों के खुलने के मामले में बिल्कुल सटीक बैठ रही हैं। दरअसल सोमवार से पूरे मध्यप्रदेश में शराब की दुकानों (liquor shops ) को तय नियमों के साथ खोला जा रहा है। इसमें ग्रीन जोन, ऑरेंज जोन शामिल हैं साथ ही रेड जोन के ग्रामीण इलाके भी फैसले के अंतर्गत आ रहे हैं। पर इसमें एक हैरान करने वाली बात है, दरअसल सरकार (government) ने तो फैसला करते हुए शराब दुकानों को खोलने का फैसला कर दिया है लेकिन लेकिन मप्र लिकर एसोसिएशन (Madhya Pradesh liquor association) इसका विरोध कर रहा है। शराब ठेकेदार बिल्कुल नहीं चाहते कि ऐसी भीषण महामारी के समय शराब ठेके खोले जाएं।

सक्रंमण फैलने का खतरा बढ़ेगा
सरकार ने राजस्व की पूर्ति के लिए शराब दुकानों को खोल तो दिया है पर इसके कारण जो संक्रमण बढ़ेगा उसकी तरफ सरकार का कोई ध्यान नही है। शराब ठेकेदारों का साफ कहना है कि हम कहीं भी शराब की दुकान नही खोलना चाहते, चाहे वो ग्रीन जोन हो या ऑरेंज। इसके पीछे का कारण बताते हुए उन्होने कहा कि ज्यादातर शराब की फैक्ट्रियां भोपाल, इंदौर और सागर में हैं। ऐसे में यहां से बनी शराब जब ग्रीन और ऑरेंज जोन में जाएगी तो वो ना जाने कितने हाथों से गुजर कर पहुंचेगी और इस कारण कोरोना के संक्रमण के फैलने का खतरा कई गुना बढ जाता है। इसीलिए हम शराब दुकानों को खोलने के विरोध में हैं।

लिकर एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि वो लगातार सरकार और आबकारी विभाग (excise department) से संपर्क बनाए हुए हैं ताकि वो इस बात को समझे और दुकानें खोलने की परमिशन को खारिज कर दे। लेकिन अगर सरकार शराब दुकानें नहीं बंद करती है तो ऐसे में हम हाईकोर्ट जाकर मदद लेंगें।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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