मासूम बच्चों के अपहरण और गुमशुदगी में पुलिस को मिली बड़ी सफलता, किया सुरक्षित दस्‍तयाब

प्रदेश के तीन जिलों विदिशा, ग्वालियर और सागर में अपहरण एवं गुमशुदगी से जुड़े तीन महत्वपूर्ण मामलों में पुलिस ने अद्भुत दक्षता और मानवीय संवेदना का परिचय दिया है।
GRP shows sensitivity

BHOPAL GRP shows sensitivity

मध्यप्रदेश पुलिस ने एक बार फिर त्वरित, प्रभावी और संवेदनशील कार्रवाई का करते हुए सफलता हासिल की है। पुलिस ने प्रदेश के अलग-अलग शहरों में ऐसे मासूमों को सुरक्षित बरामद किया है जिनका अपहरण कर लिया गया या फिर उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज है।

सागर पुलिस की कार्रवाई 

दो अपहरण मामलों में मासूम बच्चों को रिकॉर्ड समय में सुरक्षित बरामद कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, वहीं सागर में पुलिस की संवेदनशील पहल से 17 वर्ष बाद गुमशुदा बालिका अपने परिवार से पुनः मिल सकी।

विदिशा पुलिस ने किया 48 घंटे में 3 वर्षीय मासूम बरामद

थाना कोतवाली क्षेत्र से तीन वर्षीय बालिका के अपहरण की सूचना मिलने पर पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी के निर्देशन में “ऑपरेशन मुस्कान” के अंतर्गत 8 टीमों का गठन किया गया। इन टीमों ने 235 से अधिक सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण, 135 से अधिक लोगों से पूछताछ तथा कई इलाकों में सघन तलाशी अभियान चलाया। जिसके परिणामस्‍वरूप ऑटो चालक बृजेश कुशवाहा की पहचान हुई, जिसके आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुँची। अभियुक्त अर्जुन सिंह पाल, हरिबाई, रवि पाल और जितेंद्र पाल ने बच्ची को सौदे के उद्देश्य से अपहरण करने की बात स्वीकार की। पुलिस ने बच्ची को सकुशल बरामद कर परिवार को सौंपा।

ग्वालियर पुलिस की त्वरित कार्रवाई, डेढ़ वर्षीय बच्चा सुरक्षित बरामद

थाना बहोड़ापुर क्षेत्र से डेढ़ वर्षीय रोहित के गुम होने की सूचना पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह के निर्देशन में त्वरित खोजबीन प्रारंभ की गई। पुलिस टीम ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, मुखबिर तंत्र सक्रिय किया और सतत सर्च अभियान चलाया। मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने नागदेवता मंदिर, ट्रांसपोर्ट नगर से एक महिला को पकड़ा जो बच्चा लेकर घूम रही थी। महिला ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने बच्चा न होने के कारण उसे उठा लिया था। पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित परिजनों के सुपुर्द किया।

17 वर्ष बाद गुमशुदा बालिका को परिवार से मिलाया

सागर जिला 17 वर्ष बाद गुमशुदा बालिका को परिवार से मिलाया, परिवार ने कहा- ‘’यह हमारे जीवन का सबसे सुखद पल’’
11 फरवरी 2008 को चौकी मंडीबामोरा क्षेत्र से 10 वर्षीय बालिका लापता हुई थी। वर्षों तक खोजबीन जारी रहने के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला। हाल ही में इंस्टाग्राम रील देखते समय उस बालिका, जो अब बालिग है, ने मंडीबामोरा रेलवे स्टेशन का नाम देखा और उसे अपना गृहक्षेत्र याद आ गया। उसने तत्काल अपने पति संग पुलिस चौकी से संपर्क किया। पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उसके परिवार को बुलाया। बेटी अपने माता-पिता को तुरंत नहीं पहचान पाई, लेकिन पिता ने उसके माथे पर पुराने घाव के निशान से पहचान लिया। परिवार ने पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “यह हमारे जीवन का सबसे सुखद पल है। ये सभी उदाहरण न केवल प्रदेश पुलिस की दक्षता दर्शाते हैं, बल्कि समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी सुदृढ़ करते हैं।

Sushma Bhardwaj
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