
आज मोक्षदायिनी जलझूलनी एकादशी है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को जलझूलनी एकादशी मनाई जाती है जिसे डोल ग्यारस, परिवर्तिनी एकादशी, वामन एकादशी या पद्मा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व भगवान विष्णु को समर्पित है और मान्यता है कि इस दिन व्रत करने वाले भक्तों को पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
सीएम मोहन यादव ने डोल ग्यारस पर्व की सभी प्रदेशवासियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि भगवान श्रीहरि विष्णु से प्रार्थना है कि सभी पर अनवरत सुख-समृद्धि की वर्षा करते रहें, सभी के जीवन में आरोग्यता बनी रहे..यही मंगलकामना है।
मोक्षदायिनी जलझूलनी एकादशी का धार्मिक महत्व
जलझूलनी एकादशी का विशेष महत्व स्कंद पुराण में वर्णित है, जहां इसे वाजपेय यज्ञ के समान पुण्यफल देने वाला बताया गया है। मान्यता है कि भगवान विष्णु जो चतुर्मास के दौरान क्षीरसागर में योग निद्रा में रहते हैं..इस दिन करवट बदलते हैं। इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी भी कहते हैं। धार्मिक मान्यतानुसार इस व्रत को करने से भक्तों के सभी पाप नष्ट होते हैं और उन्हें सुख, समृद्धि, मान-प्रतिष्ठा और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।
इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष विधान है। मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर भारत में इस पर्व को डोल ग्यारस के रूप में उत्साहपूर्वक मनाया जाता है जहां भगवान की मूर्तियों को सुंदर डोली में सजाकर जलाशयों तक शोभायात्रा निकाली जाती है और नौका विहार कराया जाता है।
डोल ग्यारस से जुड़ी पौराणिक कथाएं
श्रीकृष्ण से जुड़ी कथा : मान्यतानुसार, श्रीकृष्ण के जन्म के बाद आने वाली एकादशी को माता यशोदा ने उनके वस्त्र धोए और उन्हें डोली में सजाकर जलाशय पर ले जाकर जल पूजन किया। इसे सूरज पूजा या कुआं पूजा भी कहते हैं। यह उनका पहला धार्मिक संस्कार था। एक मान्यता ये भी है कि श्रीकृष्ण के जन्म के बाद माता यशोदा ने उन्हें झूले में झूलाया। इसी कारण इस दिन को डोल ग्यारस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की विशेष रूप से पूजा की जाती है।
राजा बलि की कथा: वामन अवतार और राजा बलि की कथा : कथा के अनुसार जलझूलनी एकादशी भगवान विष्णु के वामन अवतार से जुड़ी है। दैत्यराज बलि ने अपने तप और यज्ञों से तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। वह धार्मिक और दानवीर था लेकिन देवताओं को इससे संकट हुआ। सभी देवता भगवान विष्णु के पास गए और उनसे प्रार्थना की। तब भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण किया और राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांगी। बलि ने सहर्ष स्वीकार किया। वामन रूप में भगवान ने पहले पग में पृथ्वी और दूसरे में स्वर्ग को नाप लिया। तीसरे पग के लिए बलि ने अपना सिर आगे किया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें पाताल लोक का स्वामी बनाया और अपनी प्रतिमा प्रदान की। इसीलिए इस एकादशी को वामन एकादशी भी कहते हैं।
मोक्षदायिनी जलझूलनी एकादशी (डोल ग्यारस) पर्व की सभी प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई।
भगवान श्रीहरि विष्णु से प्रार्थना है कि सभी पर अनवरत सुख-समृद्धि की वर्षा करते रहें, सभी के जीवन में आरोग्यता बनी रहे; यही मंगलकामना है। pic.twitter.com/v9pmLqQWoQ
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) September 3, 2025
पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

