मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग में एपी सिंह बने प्रशासनिक सदस्य, अध्यक्ष पद पर नियुक्ति टली, उमंग सिंघार ने जताया विरोध, अदालत जाने की चेतावनी

आयोग की नियुक्तियों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एक दिन पहले भी नेता प्रतिपक्ष ने बैठक से पहले विरोध जताया था। इसके बाद सीएम हाउस में हुई बैठक में अध्यक्ष पद पर सहमति नहीं बन पाई है। उमंग सिंघार ने नियुक्ति प्रक्रिया को अपारदर्शी बताते हुए अपना विरोध दर्ज किया और अदालत जाने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अन्य राज्यों की तरह यहां भी सार्वजनिक विज्ञापन और पारदर्शिता अपनाई जानी चाहिए।
MP Human Rights Commission

MP Human Rights Commission Administrative Member

मध्यप्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग के रिक्त पदों को भरने की दिशा में सोमवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अगुवाई वाली चयन समिति की बैठक में प्रशासनिक सदस्य के रूप में विधानसभा के प्रमुख सचिव ए.पी. सिंह की नियुक्ति पर सहमति बनी है। हालांकि, आयोग के अध्यक्ष और एक अन्य सदस्य के चयन को स्थगित रखा गया, जिस पर विपक्ष ने तीखा विरोध जताया है।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे अपारदर्शी और असंवैधानिक करार दिया है। मुख्यमंत्री आवास पर हुई एक बैठक में  उन्होंने नियुक्तियों पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार आयोग के लिए नियुक्तियों के लिए कोई सार्वजनिक सूचना या विज्ञापन जारी नहीं किया गया, जबकि अन्य राज्यों में विज्ञापन के माध्यम से आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। इसी के साथ उन्होंने कहा कि यदि सरकार हमारी बात नहीं सुनेगी तो हम कोर्ट के दरवाजे खटखटाएंगे।

चयन समिति की बैठक में एपी सिंह के नाम पर बनी सहमति

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में सोमवार को हुई चयन-समिति की बैठक में मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग (MPHRC) के प्रशासनिक सदस्य के रूप में विधानसभा के प्रमुख सचिव ए.पी. सिंह के नाम पर सहमति बनी है। वहीं आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति अभी टाल दी गई है। बता दें कि ए.पी. सिंह रिटायर होने के बाद ढाई साल से संविदा आधार पर सेवा दे रहे हैं। उनका मौजूदा कार्यकाल 30 सितंबर को समाप्त हो रहा है।

उमंग सिंघार ने किया विरोध, पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इन नियुक्तियों की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पारदर्शिता और समान अवसर की कमी का आरोप लगाया है। सोमवार को बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव और विधानसभा अध्यक्ष मौजूदगी में उमंग सिंघार ने नियुक्तियों पर अपनी असहमति जताई। उन्होंने “स्वप्रेरणा से प्राप्त आवेदन” का हवाला दिया और सुप्रीम कोर्ट के उन दिशानिर्देशों का उल्लेख किया, जिसमें लोकपाल और केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) जैसे निकायों के लिए खुला विज्ञापन और स्पष्ट मापदंड अनिवार्य किए गए हैं। उन्होंने कहा कि स्वप्रेरित आवेदनों को चयन का आधार नहीं बनाया जा सकता है।

कांग्रेस नेता ने दी अदालत जाने की चेतावनी

नेता प्रतिपक्ष ने यह चिंता भी जताई कि चयन समिति को भेजे गए नामों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने कहा कि भले ही मानवाधिकार आयोग अधिनियम में आरक्षण का अनिवार्य प्रावधान न हो, लेकिन नीतिगत रूप से इस तरह के निकाय में समावेशी और विविध प्रतिनिधित्व अपेक्षित है। उमंग सिंघार ने कहा कि राहुल गांधी लगातार कह रहे है कि भाजपा से संविधान को खतरा है। आज यह सच होता दिखाई दे रहा है कि भाजपा संवैधानिक पदों पर खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार हमारी बात नहीं सुनेगी तो हम कोर्ट के दरवाजे खटखटाएंगे क्योंकि यह प्रदेश की जनता के अधिकारों का मुद्दा है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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