MP में मंत्री गौतम टेटवाल पर शिक्षक ने लगाया धमकाने का आरोप, उमंग सिंघार ने की जांच और शिकायतकर्ता को सुरक्षा देने की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विपक्षी नेताओं पर बिना पर्याप्त प्रमाण के त्वरित कार्रवाई होती है, वहीं सत्ताधारी मंत्री पर आरोपों के बावजूद प्रशासन की चुप्पी साफ तौर पर सत्ता संरक्षण की ओर इशारा करती है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि देश की न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता और संविधान की गरिमा का सवाल है।
Umang Singhar Opposition Leader

Umang Singhar

मध्यप्रदेश में एक शिक्षक द्वारा मंत्री गौतम टेटवाल पर लगाए गए गंभीर आरोपों को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल किया है कि क्या कानून सभी नागरिकों के लिए समान है या सत्ता में बैठे लोगों के लिए अलग व्यवस्था लागू होती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि एक शिक्षक ने मंत्री पर जाति-प्रमाण पत्र से जुड़े मामले में दबाव बनाने, धमकी देने और झूठे केस में फंसाने जैसी गंभीर शिकायतें की हैं। उनका कहना है कि शिकायतकर्ता के अनुसार उस पर केस वापस लेने के लिए दबाव डाला गया, जान से मारने की धमकी दी गई और झूठे मामलों में फंसाने की चेतावनी भी दी गई। कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री से इस मामले में संज्ञान लेकर जांच कराने और शिकायतकर्ता को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।

ये है मामला 

मध्यप्रदेश के कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र का आरोप पहले से ही इंदौर हाईकोर्ट में लंबित है। उस मामले में याचिकाकर्ता कौमल प्रसाद शाक्य ने आरोप लगाया था कि टेटवाल ने ‘जिनगर’ समुदाय (ओबीसी) का प्रमाण पत्र बनवाकर चुनाव लड़ा, जबकि उनके पुराने स्कूल रिकॉर्ड में जाति अलग दर्ज है।

अब गौतम टेटवाल पर एक और आरोप लग रहा है। सारंगपुर कन्या शाला के एक शिक्षक ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है कि मंत्री ने उन्हें धमकाया है। उनके अनुसार मंत्री ने कहा कि तुमने ही जाति वाली शिकायत दर्ज कराई है और इसे लेकर उन्हें झूठे केस में फंसवाने और जान से मारने की धमकी दी गई। शिक्षक का कहना है कि ये पूरा मामला सीसीटीवी में कैद हो गया है।

उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री से की मांग 

इस मामले को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि जहां विपक्षी नेताओं पर बिना पर्याप्त प्रमाण के त्वरित कार्रवाई होती है, वहीं सत्ताधारी मंत्री पर आरोपों के बावजूद प्रशासन चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस प्रकरण में मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए। दोषी पाए जाने पर मंत्री गौतम टेटवाल पर कड़ी कार्रवाई की जाए और उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द की जाए और शिकायतकर्ता शिक्षक को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की जाए।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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