
मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र इन चार राज्यों के बीच चल रहे 30 साल पुराने नर्मदा जल विवाद पर मंगलवार को समझौता हो गया, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी आर पाटिल की मौजूदगी में चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों डॉ मोहन यादव, भूपेंद्र पटेल, भजनलाल शर्मा और देवेन्द्र फडणवीस ने समझौते पर हस्ताक्षर किये औए दशकों पुराना विवाद सुलझ गया लेकिन इसमें मध्य प्रदेश को लेकर हुए समझौते पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है और नाराजगी जाहिर की है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने X पर लिखा- मध्य प्रदेश डूबा… जमीन हमारी गई… गांव हमारे उजड़े… बदले में मध्यप्रदेश को ही 550 करोड़ रुपये देने होंगे। मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने वर्षों से लंबित नर्मदा जल विवाद में एक विवादास्पद समझौता किया है।
मध्य प्रदेश ने गुजरात से 7669 करोड़ रुपये का मुआवजा माँगा था
सिंघार ने कहा – सरदार सरोवर परियोजना में सबसे बड़ा डूब क्षेत्र मध्य प्रदेश का रहा। 178 गांव प्रभावित हुए, हजारों हेक्टेयर कृषि और वन भूमि जलमग्न हुई, फिर भी मोहन सरकार ने 7669 करोड़ रुपये के मुआवजे के दावे के बावजूद अब मध्य प्रदेश ने गुजरात को 550 करोड़ रुपये देकर समझौता स्वीकार कर लिया। सवाल यह है कि आखिर मध्य प्रदेश के अधिकारों से समझौता किसके हित में किया गया? जब प्रदेश ने स्वयं हजारों करोड़ रुपये का दावा किया था, तो फिर इतनी बड़ी राशि छोड़ने का फैसला क्यों लिया गया?
कांग्रेस की मांग, समझौते की शर्तें और तथ्य सार्वजनिक किये जाएँ
नेता प्रतिपक्ष ने कहा- मध्य प्रदेश की जमीन, किसानों, आदिवासियों और विस्थापित परिवारों के अधिकारों की कीमत अब कौन देगा? मुख्यमंत्री जी, मध्यप्रदेश की जनता जानना चाहती है कि आखिर किन तथ्यों पर आपने प्रदेश के अधिकारों से समझौता किया? किस आधार पर मध्यप्रदेश के हक़ को छोड़ दिया गया? कृपया पूरे समझौते की शर्तें और तथ्य जनता के सामने सार्वजनिक करें।
चारों राज्यों ने एक दूसरे पर किया था करोड़ों रुपये का दावा
उल्लेखनीय है कि चारों राज्य के बीच इस संयुक्त परियोजना में वित्तीय लेनदेन का विवाद करीब 30 सालों से चल रहा था, इसमें गुजरात ने तीनों राज्यों पर दावा ठोका और तीनों राज्यों ने गुजरात पर दावा ठोका था, गुजरात ने मध्य प्रदेश पर 5516.50 करोड़ रुपये का दावा किया था, महाराष्ट्र पर 1883.84 करोड़ रुपये का दावा किया था और राजस्थान पर 574.52 करोड़ रुपये का दावा किया था।
एमपी, राजस्थान और महाराष्ट्र अब गुजरात को देंगे पैसा
बदले में मध्य प्रदेश ने गुजरात पर 7669 करोड़ रुपये का दावा किया था इसकी वजह ये थी इस परियोजना में मध्य प्रदेश की सबसे ज्यादा खेती की जमीन डूबी, सबसे ज्यादा गाँव उजड़े, सबसे ज्यादा जंगल डूबे इसलिए मध्य प्रदेश ने इसका हर्जाना मांगा, महाराष्ट्र ने भी वन भूमि , सरकारी संपत्ति आदि के आधार पर 3000 करोड़ रुपए की मांग रखी, लेकिन जो समझौता हुआ उसमें डेम की बढ़ी हुई लागत के आधार पर मध्य प्रदेश , राजस्थान और महाराष्ट्र को अब गुजरात को 550- 550 करोड़ रुपये देने होंगे, और इसी बात पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है।
मध्यप्रदेश डूबा… जमीन हमारी गई… गांव हमारे उजड़े… बदले में मध्यप्रदेश को ही ₹550 करोड़ देने होंगे।
मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने वर्षों से लंबित नर्मदा जल विवाद में एक विवादास्पद समझौता किया है।
सरदार सरोवर परियोजना में सबसे बड़ा डूब क्षेत्र मध्यप्रदेश का रहा। 178 गांव…
— Umang Singhar (@UmangSinghar) July 8, 2026
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