अब घर बैठे उठाइये शराब का मजा, सरकार शुरू करने जा रही होम डिलीवरी!

अब घर बैठे उठाइये शराब का मजा, सरकार शुरू करने जा रही होम डिलीवरी!

भोपाल

कोरोना (corona) संक्रमण को देखते हुए सरकार (government) इस बात पर गंभीरता से विचार कर रही है कि सुरा प्रेमियों की सुविधा के लिए शराब (alcohol) की होम डिलीवरी (home delivery) की जाए। राज्य सरकार के वाणिज्य कर विभाग (commercial tax department) ने इस तरह का प्रस्ताव (proposal) बना लिया है और उसे सरकार को भेजा जा रहा है।

इस प्रस्ताव के तहत शहरी क्षेत्रों (urban area) में एक किलोमीटर के क्षेत्र में और ग्रामीण क्षेत्रों (rural area) में 5 किलोमीटर के क्षेत्र में शराब की होम डिलीवरी की जा सकेगी ।इस डिलीवरी के लिए प्रति डिलीवरी 100 रूपये अतिरिक्त भुगतान उपभोक्ता को करना होगा। इसके साथ-साथ सरकार हर व्यक्ति को शराब (alcohol) रखने की अधिकतम लिमिट भी बढ़ाने जा रही है जिसके तहत अब तक एक बियर पेटी की जगह अब व्यक्ति दो बियर पेटी रख सकेगा। वही चार बोतल शराब रखने की लिमिट को अब एक पेटी किया जा रहा है। इसके साथ-साथ वाइन की भी एक पेटी की प्रति उपभोक्ता रख सकेगा। हालांकि सरकार की यह व्यवस्था केवल कोरोना के समय रहेगी और उसके बाद इसे समाप्त कर दिया जाएगा , इस तरह का भी प्रस्ताव में उल्लेख किया गया है। अब देखना यह है कि शराब के सख्त खिलाफ रहे मध्य प्रदेश (madhya prradesh) के मुख्यमंत्री (chief minister) शिवराज सिंह (shivraj singh chauhan) क्या इसे अनुमति देते हैं।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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