पुलिस ने सुरीले अंदाज़ में गाना गाकर दी कोरोना से बचने की समझाइश, देखिये वीडियो

पुलिस ने सुरीले अंदाज़ में गाना गाकर दी कोरोना से बचने की समझाइश, देखिये वीडियो

भोपाल

पुलिस प्रशासन हरसंभव कोशिश कर रहा है कि लॉकडाउन के दौरान व्यवस्थाएं बनी रहे और लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करे। इसके लिये लगातार पुलिस पेट्रोलिंग टीम द्वारा शहर के अलग अलग इलाकों में अनाउंसमेंट हो रहे हैं और समझाईश दी जा रही है कि किस तरह कोरोना से बचाव किया जा सकता है। अब लॉकडाउन को इतने दिन बीत जाने के बाद पुलिस भी लोगों को जागरूक करने के लिये नए और रोचक तरीके इजाद कर रही है और इसी कड़ी में सोमवार को भोपाल पुलिस ने सुरीले अंदाज़ में कोरोना से बचने का संदेश दिया साथ ही दिन रात काम में लगे अपने पुलिसकर्मी साथियों का हौसला भी बढ़ाया।

सोमवार को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (दूरसंचार) एसके झा एवं एसएसपी साकेत पांडे के निर्देशन में पुलिस दूरसंचार मुख्यालय एवं राज्यस्तरीय डायल -100 पुलिस कंट्रोल रूम के पुलिस अधिकारियों ने दो टीम बनाकर जेपी अस्पताल के मेडीकल स्टाफ एवं गरीब बस्तियों में जाकर असहाय लोगों को भोजन के पैकेट वितरण किए। इस दौरान सहायक उपनिरीक्षक (रेडियो) प्रभात श्रीवंश द्वारा गाना गाकर उनका हौंसला बढ़ाया । वैश्विक आपदा कोविड-19 कोरोना वायरस संक्रमण के समय देश भर में लॉक डाउन के कारण कई परिवारों को भोजन मिलने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है,  ऐसे समय में मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा जन सेवा के उत्कृष्ट प्रयास किये जा रहे हैं । इसी पुलिस द्वारा सह्याद्रि परिसर भदभदा रोड़, अंजलि अपार्टमेंट माता मन्दिर एवं रोशनपुरा चौराहा न्यू मार्केट में गाना गाकर इस आपदा के समय लोगों को एकजुट होकर लड़ने और सोशल डिस्टेन्सिंग का पालन करने हेतु प्रेरित किया गया।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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