पीएससी चयनित महिला प्रतिभागियों ने वीडियो बनाकर ज़ाहिर की अपनी पीड़ा, देखिये वीडियो

MPPSC

भोपाल

एमपीपीएससी (mppsc) की 2017 की असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा (assisstant professor examination) में मैरिट (merit) के आधार पर चयनित हुई अनुसूचित जाति (scheduled cast) जनजाति (tribal) व पिछड़ा (obc)) वर्ग की 91 महिलाओं ने अपनी पीड़ा एक वीडियो (video) के माध्यम से व्यक्त की है। दरअसल इन महिलाओं ने रिजर्व सीट होने के बावजूद मैरिट के आधार पर नंबर लाकर सामान्य सीटों पर चयनित होने में सफलता प्राप्त की थी। बस यही इनके लिए मुसीबत बन गई।

एमपी पीएससी की परीक्षा कई महिलाओं ने आरक्षित वर्ग एससी, एसटी और ओबीसी कैटेगरी में दी थी। इनमें से 91 महिलाएं मेरिट में आईं। पीएससी के नियम के अनुसार मेरिट में आने वाले अभ्यार्थियों को आरक्षित वर्ग से अनारक्षित वर्ग की सूची में रखा जाता है।इसलिए यह सभी 91 महिलाएं नियम के तहत अनारक्षित वर्ग में आ गईं। उच्च शिक्षा विभाग ने खाली पड़े आरक्षित वर्ग के पदों पर असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती करते हुए नियुक्ति आदेश जारी कर दिए थे लेकिन विभाग ने आरक्षित वर्ग से अनारक्षित वर्ग में आई 91 महिलाओं को लेकर कोई भी रास्ता नहीं निकाला। ऐसे में मेरिट में आईं सभी महिलाएं की नियुक्ति नही हो पायी। सरकार के तमाम दावे और आश्वासन भी बेमानी साबित हुए। इन लोगों ने भोपाल में कई बार धरना भी दिया लेकिन इन्हें हर बार निराशा ही हाथ लगी।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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