पूर्व मंत्री का बागी दोस्त बोला, मैं वाइवा में नंबर नहीं बढ़वाता तो डॉक्टर नहीं बन पाते प्रभुराम चौधरी

पूर्व मंत्री का बागी दोस्त बोला, मैं वाइवा में नंबर नहीं बढ़वाता तो डॉक्टर नहीं बन पाते प्रभुराम चौधरी

भोपाल

राजनीति (politics) भी अजीब है। महत्वाकांक्षा बढ जाए तो दोस्त भी दुश्मन हो जाते हैं, और जरूरत हो तो कट्टर से कट्टर दुश्मन भी दोस्त बना लिया जाता है। कांग्रेस (congress) छोड़ भाजपा (bjp) में गए सिंधिया (scindia) समर्थक डॉक्टर प्रभु राम चौधरी (dr.prabhuram chaudhri) पर लंबे समय तक के साथी रहे एक कांग्रेस से जुड़े वकील साहब ने मंत्रीजी पर गाली गलौज करने और धमकाने का आरोप लगाया है। इस मामले की शिकायत उन्होने सांची (sanchi) थाने में की है है।

अमृत रामबाबू नरवारे नाम के इन वकील साहब का कहना है कि 23 तारीख की शाम को जब वे सांची बस स्टैंड के पास अपने कार्यालय को बंद करके घर जा रहे थे तभी डॉक्टर प्रभु राम चौधरी ने उनके पास आकर अपनी गाड़ी रोकी और जातिसूचक गालियां दी। वकील साहब ने इसका कारण यह बताया कि क्योंकि अब प्रभु राम ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी ज्वाइन कर ली है लेकिन खुद वकील साहब कांग्रेस में ही रहना चाहते हैं इसलिए प्रभु राम ने यह धमकी दी । यहां तक तो ठीक था लेकिन वकील साहब ने प्रभु राम चौधरी के बारे में गड़े मुर्दे उखाड़ने शुरू कर दिए । उन्होंने कहा कि जब प्रभु राम चौधरी डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे थे और गांधी मेडिकल कॉलेज (gandhi medical college) में थे तो वे तो डॉक्टरी की पढ़ाई में ही फेल हो गए और वो डॉक्टर बन ही नहीं पाते। तब हम लोगों ने एक डॉक्टर शर्मा से कहकर उनके वायवा में नंबर बढवाए गए और प्रभु राम डॉक्टर बन पाए। इतना ही नहीं कि वकील साहब ने यहा तक कह दिया कि वे प्रभु राम जी के सारे चिट्ठे जानते हैं क्योंकि उनको बनाने वाले वे ही हैं। वकील साहब का कहना है कि उनको एसपी (SP) रायसेन (raisen) बार बार बुला रही हैं और गिरफ्तारी की बात कह रही है कि उन्होंने प्रभु राम के बारे में सब कुछ गलत लिखा है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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