RTE के तहत प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश के लिए द्वितीय चरण, 16 से 20 जून के बीच पोर्टल पर अपडेट कर सकेंगे च्वॉइस

जिन आवेदकों को प्रथम चरण में स्कूल आवंटन हुआ था परंतु स्कूल पसंद नहीं आने के कारण प्रवेश नहीं लिया है वे भी द्वितीय चरण में च्वॉइस अपडेट कर सकेंगे। 
Right to Education
नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम  RTE के तहत आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित समूह के बच्चों को निजी स्कूलों में नि:शुल्क प्रवेश दिलाने के लिये दूसरा चरण आयोजित होगा। इस संबंध में राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा कार्यक्रम निर्धारित कर दिया गया है।
राज्य शिक्षा केंद्र ने कहा है कि प्रथम चरण के बाद जिन प्राइवेट स्कूलों में सीटें खाली रह गई हैं, ऐसे स्कूलों की सूची रिक्त सीटों सहित द्वितीय चरण की प्रवेश प्रक्रिया के लिये पोर्टल पर प्रदर्शित कर दी गई है। उल्लेखनीय है कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत प्रथम चरण की प्रक्रिया 10 जून को पूर्ण हो चुकी है।

नवीन आवेदन और पुन: सत्यापन करने की जरूरत नहीं

 शिक्षा विभाग के मुताबिक द्वितीय चरण की प्रक्रिया के तहत नवीन आवेदन और पुन: सत्यापन करने की जरूरत नहीं होगी। जिन आवेदकों द्वारा प्रथम चरण में आवेदन किया था एवं सत्यापन के बाद पात्र पाए गए थे, परंतु प्रथम चरण में कोई स्कूल आवंटित नहीं हुआ है वे द्वितीय चरण के लिये अपनी च्वॉइस अपडेट (विकल्प चयन) कर सकते हैं।

25 जून को निकलेगी द्वितीय चरण की लॉटरी

द्वितीय चरण के लिये निर्धारित कार्यक्रम के तहत आवेदकों द्वारा स्कूलों की च्वॉइस को अपडेट करने के लिये 16 से 20 जून तक की तिथि निर्धारित की गई है। द्वितीय चरण की लॉटरी 25 जून को निकलेगी। स्कूल आवंटन के बाद प्रवेश एवं संबंधित स्कूल द्वारा मोबाइल एप से एडमिशन रिपोर्टिंग 25 से 30 जून तक होगी।

83 हजार 483 बच्‍चों को उनके द्वारा चयनित स्‍कूलों का आवंटन

बता दें इस वर्ष 29 मई को निकाली गई आरटीई के तहत लॉटरी के लिए दस्तावेज सत्यापन के उपरांत एक लाख 66 हज़ार 751 बच्चे पात्र मिले। जिनमें से 83 हजार 483 बच्‍चों को उनके द्वारा चयनित स्‍कूलों का आवंटन किया गया है। इनमें से 43 हजार 363 बालक एवं 40 हजार 120 बालिकाएं हैं। जिन्हें रेंडम पद्वति से स्कूल का आवंटन किया गया है।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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