…तो इसलिए कमलनाथ के मंत्री को खाली करना होगा अपना बंगला

…तो इसलिए कमलनाथ के मंत्री को खाली करना होगा अपना बंगला

भोपाल।
विधानसभा परिसर में विध्य कोठी नाम से एक सरकारी बंगला है, जो कमलनाथ सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री लखन घनघोरिया को आवंटित किया गया है।लेकिन अब मंत्री को यह बंगला खाली करना होगा। क्योंकि विधानसभा सचिवालय ने गृह विभाग को पत्र लिखकर यह बंगला खाली करने को कहा है। इसके पीछे तर्क दिया गया है कि यह विधानसभा परिसर में है, इसलिए इसे विधानसभा के अधीन किया जाए।

दरअसल, इन दिनों मध्यप्रदेश विधानसभा अपने 105 एकड़ पर अवैध कब्जा हटाने में जुटी हुई है। इसी के चलते राज्य सरकार को पत्र लिख कहा है कि परिसर को अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाए। साथ ही यहां परिसर स्थित सरकारी बंगलों को भी विधानसभा के अधीन किया जाए।इसमें एमएलए रेस्ट हाउस के पास बनी विंध्य कोठी भी शामिल है जिसमें फिलहाल मंत्री लखन घनघोरिया रह रहे है। वही विधानसभा सचिवालय ने पत्र में एमएलए रेस्ट हाउस में बनी चार सौ झुग्गियों को भी सुरक्षा के मद्देनजर वहां से हटाने के लिए कहा गया है।

परिसर में 400 अवैध झुग्गी हैं। विधानसभा ने इस अवैध बस्ती को खाली कराए जाने के लिए सरकार से कहा है। इस संबंध में विधानसभा सचिवालय ने नगरीय प्रशासन विभाग एवं जिला कलेक्टर को पत्र भी लिखा है। इसी प्रकार यहां स्थिति सरकारी बंगलों पर भी कब्जा मांगा है। विधानसभा सचिवालय ने गृह विभाग को लिखे पत्र में कहा है कि सरकार यह बंगला विधानसभा को दे। इसके पीछे तर्क दिया है कि चूंकि यह विधानसभा परिसर में है, इसलिए इसे विधानसभा के अधीन किया जाए। सरकार चाहे तो इसके बदले में विधानसभा परिसर के बाहर स्थित विधानसभा पूल के किसी अन्य बंगले को ले ले।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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