युवा विधायक सम्मेलन में शामिल हुए उमंग सिंघार, कहा “लोकतंत्र की मजबूती के लिए छात्र संघ चुनाव जरूरी”

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विकास कार्यों में राजनीति नहीं होनी चाहिए। सड़क, पानी, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं सभी नागरिकों के लिए हैं..चाहे वे किसी भी पार्टी से जुड़े हों। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर विरोध नहीं होना चाहिए और जनप्रतिनिधियों को पार्टी से ऊपर उठकर क्षेत्र के समग्र विकास के बारे में सोचना चाहिए।
Umang Singhar Youth Legislators Meet

Umang Singhar

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आज मध्यप्रदेश विधानसभा में आयोजित मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं राजस्थान के युवा विधायक सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस सम्मेलन में युवा जनप्रतिनिधियों के साथ लोकतांत्रिक मूल्यों, विधानसभा की कार्यप्रणाली और जनसेवा के प्रभावी तरीकों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

अपने संबोधन में उमंग सिंघार ने कहा कि नेतृत्व पद से नहीं बल्कि कॉलेज और छात्र संघ से शुरू होता है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि हमारे यहां छात्र संघ चुनाव बंद हो गए हैं, जबकि ये युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने का सबसे प्रभावी माध्यम रहे हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि कॉलेज के समय युवाओं के अंदर सिस्टम से लड़ने की ऊर्जा और बदलाव की सोच उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा कि युवा नेतृत्व से लोकतंत्र मज़बूत होता है इसलिए छात्र संघ चुनाव जरूरी है।

युवा विधायक सम्मेलन में शामिल हुए उमंग सिंघार

युवा विधायक सम्मेलन में उमंग सिंघार ने युवा विधायकों से कहा कि “आप सभी के पास नई सोच है और आप लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी चाहते हैं। लोकतंत्र की जड़ें तभी मजबूत होंगी, जब देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था सशक्त और जनप्रतिनिधियों की आवाज़ प्रभावी होगी।” उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में एआई और डेटा साइंस के बढ़ते प्रभाव के बीच इसका जिम्मेदारी से उपयोग करना बेहद जरूरी है।”

जनता से जुड़ने की बात कही

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव जीतना कोई कला नहीं है, बल्कि जनता से दिल से जुड़ाव असली ताकत है। कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि जनप्रतिनिधि ईमानदारी और समर्पण से जनता के काम करें तो उन्हें हार का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि विधायक संसदीय परंपराओं के तहत नियम-कानून बनाने के अधिकारी हैं लेकिन जनता इस बात पर ध्यान देती है कि उनके क्षेत्र की समस्याएं विधानसभा में कितनी उठाई जा रही हैं।

उमंग सिंघार ने कहा कि हर जनप्रतिनिधि को अपने क्षेत्र की समस्याओं, कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं और उपलब्ध संसाधनों के बीच संतुलन बनाना होता है। उन्होंने जोर दिया कि सीमित बजट में रणनीति के साथ काम करना आवश्यक है और ऐसी प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए जो अधिकतम लोगों को लाभ पहुंचाएं। उन्होंने विधानसभा की नियमित बैठकों की आवश्यकता बताते हुए कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब विधायकों की आवाज़ संसद और विधानसभा में प्रभावी रूप से सुनाई दे।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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