MP: अधिकारी का बेटा ऑस्ट्रेलिया में फंसा, वतन वापसी की लगाई गुहार

MP: अधिकारी का बेटा ऑस्ट्रेलिया में फंसा, वतन वापसी की लगाई गुहार

भोपाल| वैश्विक महामारी कोविड-19 के चलते ऑस्ट्रेलिया में कई भारतीय फंसे हुए हैं| कुछ नौकरी, तो कुछ उच्च शिक्षा के लिए वहाँ गए हुए थे| जो अब अपने वतन लौटने मदद की गुहार लगा रहे हैं| मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग के संयुक्त संचालक राजेश मलिक का बेटा वरूण मलिक भी ऑस्ट्रेलिया में फंसा हुआ है| वहाँ एम्बेसी और PMO में भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।

वरुण मालिक ने ऑस्ट्रेलिया में फंसे भारतीयों को लेकर ईमेल के माध्यम से अपनी व्यथा बताई है| उनका कहना है कि कोरोना के कारण ऑस्ट्रेलिया में लगभग हजार लोग फंस गए हैं, जिनकी यात्रा करने के विभिन्न कारण हैं, जिनमें शामिल हैं – नौकरीपेशा लोग या छात्र जो घर के किराए और खाने के खर्च के लिए संघर्ष कर रहे हैं| यह लोग पर्यटक VISA पर आए और होटल में रुके हुए हैं| कुछ बुजुर्ग माता-पिता सीमित दवाओं के साथ अटके हुए हैं, कोई भारत में अपने परिवार को वापस देखने के लिए इंतजार कर रहा है, कोई इस तरह के संकट में बुजुर्ग माता-पिता का साथ देने के लिए घर जाने के लिए बेताब है। ऑस्ट्रेलिया सरकार हमारे जैसे लोगों को काम / पर्यटक / छात्र वीजा पर नहीं दे सकती है, इसलिए सभी को वित्तीय और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।

ईमेल में उन्होंने कहा लगभग हम सभी ने सिडनी / मेलबर्न / पर्थ में भारतीय वकील तक पहुंचने की कोशिश की है। सभी प्रतिक्रियाएं मानक टेम्पलेट्स की तरह हैं, भारतीयों के प्रति सहानुभूति के बिना। ऐसा लगता है कि वे हमें घर वापस लाने के बारे में सोचने की योजना भी नहीं बना रहे हैं। हम सरकार के अधिकारियों, PMOIndia, CMOMaharashtra, HardeepSPuri और ट्वीटर पर कुछ और टैग कर रहे हैं। लेकिन हमें कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। उन्होंने घर वापस लाने के लिए मदद की गुहार लगाईं है|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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