VIDEO: भोपाल में आईपीएस अफसरों से भरी नाव पलटी, कई पानी में गिरे

VIDEO: भोपाल में आईपीएस अफसरों से भरी नाव पलटी, कई पानी में गिरे

भोपाल।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बार नाव पलटने का मामला सामने आया है। यहां आईपीएस अफसरों से भरी एक बोट बड़े तालाब में पलट गई। इसमें करीब 8 से10 अफसर सवार थे। सभी अफसरों ने लाइफ जैकेट पहनी हुई थी। समय रहते तुरंत ही रेस्क्यू कर उन्हें बचा लिया गया।

दरअसल, राजधानी भोपाल में दो दिवसीय आईपीएस मीट का आयोजन किया गया है। आज मीट के दूसरे दिन सभी आईपीएस अफसर वाटर स्पोर्ट्स के लिए बोट क्लब पर अपने परिवार के साथ पहुंचे थे। करीब एक दर्जन बोट अफसरों और उनके परिवार को बोटिंग करवा रही थी। कुछ लोग ड्रेगन बोट में बैठे थे।तभी अचानक आईपीएस अधिकारियों व परिजनों से भरी एक नाव पलट गई। हालांकि लाइफ जैकेट पहनने के चलते बड़ा हादसा टल गया। साथ ही सेफ्टी गार्ड भी तत्काल अधिकारियों को बचाने के लिए पहुंच गए। हादसे के दौरान मध्यप्रदेश के डीजीपी विजय कुमार सिंह की पत्नी भी नाव में मौजूद थीं ।प्रारंभिक सूचना आई कि दो आईपीएस अफसर पानी में लापता हो गए हैं, लेकिन बाद में पता चला कि वे सुरक्षित हैं।

पुलिस वेलफेयर के एडीजी विजय कटारिया ने बताया कि नाव में मौजूद सभी लोगों ने लाइफ जैकेट्स पहनी थी, इसलिए कोई हताहत नहीं हुआ. हर बार आईएएस और आईपीएस मीट में अधिकारी वाटर स्पोर्ट्स में हिस्सा लेते हैं, जिसमें सुरक्षा के लिहाज से लाइफ जैकेट्स और सेफ्टी बोट तैनात रहती ।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews