जानिए, क्‍या है ‘बीटिंग द रिट्रीट’

जानिए, क्‍या है ‘बीटिंग द रिट्रीट’

भोपाल। ‘बीटिंग द रिट्रीट’ कार्यक्रम गणतंत्र दिवस की समाप्ति के बाद 29 जनवरी को हर वर्ष मनाया जाता है। इस आयोजन से ही गणतंत्र दिवस आयोजनों का आधिकारिक रूप से समापन घोषित करता है। गौर हो कि 26 जनवरी से 29 जनवरी के बीच विभिन्‍न कार्यक्रमों के लिए सभी महत्‍वपूर्ण सरकारी भवनों को रोशनी से सजाया जाता है। यह सेना की बैरक वापसी का भी प्रतीक हर वर्ष 29 जनवरी की शाम को अर्थात गणतंत्र दिवस के बाद अर्थात गणतंत्र की तीसरे दिन बीटिंग द रिट्रीट आयोजित किया जाता है।

मध्यप्रदेश में गणतंत्र दिवस समारोह का समापन 29 जनवरी को ’’बीटिंग द रिट्रीट’’ समारोह के साथ होगा। समारोह का आयोजन राज्‍यपाल लालजी टण्‍डन के मुख्‍य आतिथ्‍य में इस दिन सायंकाल 5:00 बजे जहाँगीराबाद स्थित मोतीलाल नेहरु स्टेडियम में से होगा। आम नागरिकगणों से भी इस भव्‍य एवं गारिमामयी कार्यक्रम में भाग लेने की अपील की गई है। मंगलवार को सायंकाल विशेष पुलिस महानिदेशक विजय यादव के मार्गदर्शन में ”बीटिंग द रिट्रीट” कार्यक्रम की फायनल रिहर्सल की गई। मुख्‍य अतिथि की भूमिका 7वी वाहिनी के प्रधान आरक्षक रामचंद्र कुशवाह ने निभाई। इस अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक एसएएफ सहित अन्‍य वरिष्‍ठ अधिका‍री मौजूद थे।

’’बीटिंग द रिट्रीट’’ कार्यक्रम में पुलिस ब्रास बैण्ड कॉन्‍सर्ट, और फिर ब्रास व पाइप बैण्ड का संगीतमयी और मानोहारी प्रदर्शन होगा। ब्रास बैण्डस द्वारा कर्णप्रिय संगीतमयी धुन, सामूहिक वादन तथा क्‍विक एवं स्‍लो मार्च प्रस्तुतिया दी जाएँगी। कार्यक्रम की समापन के समय सभी बैण्ड सामूहिक प्रस्तुति देंगे व ’’सारे जहाँ से अच्छा’’ के गाने पर मार्चपास्ट करेंगे। राष्ट्रगान के पश्चात् आकर्षक आतिशबाजी होगी।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews