भोपाल में अब आरक्षक कोरोना पॉजिटिव, 12 पुलिसकर्मियों को तत्काल छुट्टी पर भेजा

भोपाल में अब आरक्षक कोरोना पॉजिटिव, 12 पुलिसकर्मियों को तत्काल छुट्टी पर भेजा

भोपाल।

इंदौर के बाद राजधानी भोपाल मे भी कोरोना वायरस तेजी से पैर पसारता जा रहा है।आईएएस अधिकारी के बाद ऐशबाग थाने में पदस्थ कांस्टेबल के कोरोना पॉजिटिव होने के बाद हड़कंप मच गया है।वह टीटी नगर थाने के पास स्थित मल्टी में अपने परिवार के साथ रहते हैं। जिसके चलते राजधानी में अब मरीजों की संख्या बढ़कर 15 हो गई।

इधर, कांस्टेबल के सीधे संपर्क में आने वाले 12 पुलिसकर्मियों को तत्काल छुट्‌टी पर भेज दिया गया है।, वही तीन और इलाके कंटेनमेंट किए गए है। काेराेना पाॅजिटिव मरीज मिलने के बाद इन इलाकाें काे भी कंटेनमेंट घाेषित कर दिया गया है। जहांगीराबाद स्थित बड़वाली मस्जिद, टीटी नगर थाने के पास स्थित पुलिस आवास और त्रिलंगा की फाॅर्च्यून प्राइड काॅलाेनी काे एपीसेंटर घाेषित किया गया है। आसपास के एक किलाेमीटर एरिया काे कंटेनमेंट एरिया बनाया है। ऐसे में इन इलाकाें में रहने वाले ढाई हजार ज्यादा लाेगाें की आवाजाही पर राेक लगा दी गई है। इसके पहले चार अन्य इलाकों को कंटेनमेंट घोषित किया जा चुका है।

बता दे कि आईएएस अधिकारी के बाद ऐशबाग थाने में पदस्थ कांस्टेबल , आर्मी मैन के अलाना चार जमाती असदउल्ला, नसीम अहमद, मो. हमदी व मो. अरशद शुक्रवार को कोरोना पॉजिटव पाए गए है। ये जमाती 24 जनवरी से बड़वाली मस्जिद में रुके हुए थे। इससे पहले वे शहर की दूसरी मस्जिदाें में भी गए थे।जिसके बाद से प्रशासन में हड़कंप मच गया है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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