सिंधिया समर्थक मंत्री का “राजा” पर पलटवार..भाई के BJP में जाने पर भूले थे गद्दार की परिभाषा

सिंधिया समर्थक मंत्री का “राजा” पर पलटवार..भाई के BJP में जाने पर भूले थे गद्दार की परिभाषा

भोपाल।

मध्यप्रदेश में कोरोना संकटकाल के बीच भी राजनैतिक आरोप प्रत्यारोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। आये दिन दोनों पार्टियों के नेता एक दूसरे पर जुबानी हमला बोलते नजर आते रहते हैं। इसी बीच पूर्व मंत्री दिग्विजय सिंह के सोशल मीडिया अपील पर अब सिंधिया समर्थक खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने पलटवार किया है। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि जब पूर्व मुख्यमंत्री के खुद के भाई बीजेपी में शामिल हुए थे तब क्या दिग्विजय को गद्दार शब्द का मतलब नहीं पता था।

दरअसल रविवार को दिग्विजय सिंह के फेसबुक पोस्ट पर पलटवार करते हुए मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने कहा कि जब खुद दिग्विजय सिंह के छोटे भाई लक्ष्मण सिंह कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। तब क्या वो गद्दार नही हुए थे। ज्ञात तब दिग्विजय सिंह मौन क्यों थे क्या तब वो गद्दार कीपरिभाषा भूल गए थे। ज्ञात हो कि दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस के बागी नेताओं को गद्दार कहा था। वहीँ सिंधिया समर्थक मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने कहा कि श्रीमंत सिंधिया की खोज करने वाले मुख्यपूर्ण काम करने में लगे हैं। सिंधिया जनमानस के नेता हैं और वो लोगों के बीच रहना पसंद करते हैं, दिल्ली में नहीं।

बता दें कि गुरुवार को अपने फेसबुक पेज पर दिग्विजय सिंह ने जनता से अपील करते हुए कहा था कि चाहे आप कांग्रेस समर्थक हो या बीजेपी के इन 22 पूर्व विधायकों का हराना देश के लोकतंत्र के लिये जरूरी है । क्योंकि अगर ये जीत गए तो ये परंपरा हर पार्टी में चल पड़ेगी जनता चुनाव में वोट दे ना दे विधायक खरीदो और सरकार बनाओ। दिग्विजय सिंह ने कहा कि विधायकों की मंडी लगेगी बड़े नेता दलाल बन बैठेंगे। दिग्विजय सिंह ने जनता से अपील की थी कि अगर ये 22 बुरी तरह हार गए तो देश मे कोई भी पार्टी विधायक खरीदने को तैयार नही होगी और कोई विधायक भी बिकने को तैयार नही होगा। जिसपर अब गोविन्द सिंह राजपूत ने पलटवार किया है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews